तीनों वरीय पदाधिकारियों द्वारा कुलपति पर लगाए आरोप गम्भीर
लिखे पत्र में डॉक्टर राठौर ने कहा कि संयुक्त रूप से लिखे पत्र में तीनों पदाधिकारियों ने जो 6 आरोप लगाए वो अपने आप में बड़ी बात है लगाए आरोप में UMIS प्रभारी को बिना सिंडीकेट के अनुमोदन के 3.5 करोड़ भुगतान करने नहीं करने पर राजभवन से शिकायत की धमकी, कुलपति की छत्रछाया में UMIS द्वारा प्रतिवर्ष फर्जी कंपनी से सांठगांठ कर छात्रों लगभग दो करोड़ की उगाही, लोकभवन, सरकार के आदेश से समर्थ पोर्टल पर जारी काम में लगे पदाधिकारियों को धमकाना,विगत वर्ष में मनमाफिक कार्य नहीं होने पर लोकभावन को गलत रिपोर्टिंग कर पदाधिकारियों को हटा नए पदाधिकारियों से तीन करोड़ का भुगतान कराना, विश्वविद्यालय रिकार्ड से भिन्न अंकपत्र देना, ऑनलाइन अंकपत्र,प्रमाणपत्र आदि भेजने की पहल को साजिश के तहत बंद कर UMIS को देने की साजिश जैसे आरोप हैं.
लगाए आरोप पर जांच की जगह नई नियुक्ति से लोकभवन की कार्यशैली पर सवाल
पत्र में राठौर ने कहा कि महामहिम ये किसी भी स्तर पर सामान्य आरोप नहीं हैं बल्कि विश्वविद्यालय के अंदर चल और पल रहे बड़े कुचक्र का भंडाफोड़ है. लेकिन ऐसे आरोपों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के बजाय इन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर नए कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति करना सबको अचंभित कर गया. स्थानीय एवं प्रांतीय स्तर पर लोगों में यह चर्चा जोड़ो पर है कि आखिर यह कैसा न्याय है जब पीड़ित के आरोपों की जांच कर न्याय के बजाय आरोपी को ही संरक्षण दिया जाए.
वर्तमान कुलपति की कार्यशैली विश्वविद्यालय को समय समय पर करती रही है असहज
पत्र के माध्यम से डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने महामहिम कुलाधिपति से साझा किया है कि वर्तमान कुलपति का कार्यकाल प्रारंभ से ही विवादों से जुड़ा रहा है विगत के महामहिम को चेयर के संबंध में खुले मंच से गलत जानकारी देने, एक अन्य दीक्षांत में लचर व्यवस्था के कारण महामहिम का विरोध झेलने, फैसलों में हिंदू मुस्लिम की राजनीति, आदि स्थानीय स्तर पर छात्र, शिक्षक, कर्मचारियों के साथ इनके संबंध सर्वाधिक कटु माने जाते हैं इनके दुर्व्यवहार की ऐसी अनगिनत दास्तान हैं. लगाए गए आरोप इस लिए भी अहम हैं क्योंकि पद पर रहते हुए तीन बड़े पदाधिकारियों ने आरोप लगाए हैं जो उनके साहस को दिखाता है. इतना ही नहीं सत्ता पक्ष के गंभीर प्रतिनिधि एमएलसी संजीव कुमार ने ने भी वर्तमान कुलपति के कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं.
उच्च स्तरीय जांच कमिटी का हो गठन और दोषियों पर कार्रवाई अन्यथा लोकभवन से उठेगा विश्वास
राठौर ने मांग किया कि अविलंब लगाए गए आरोपों पर अपने स्तर से संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कमिटी बना हकीकत को सामने लाने का प्रयास किया जाए अगर कुलपति गलत हैं तो उनपर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो वहीं अगर आरोप गलत हो तो आरोप लगाने वालों पर भी जानबूझकर विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने का मामला बना करवाई हो जिससे जहां लोगों को महामहिम एवं लोकभवन पर विश्वास बना रहे वहीं कर्तव्यपथ पर गलत न करने प्रेरणा भी मिले.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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