सहरसा
बीएन मंडल विवि अन्तर्गत एमएलटी कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्यों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग एनएसयूआई ने की. साथ ही रेस्टोरेंट निर्माण मामले में विवि प्रशासन की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया है.
इस मामले में एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उक्त रेसटोरेंट्स का उद्घाटन तत्कालीन प्रतिकुलपति और कुलसचिव द्वारा करना काफी कुछ बयां कर रहा है. जबकि रेस्टोरेंट का निर्माण नियम परिनियम के विरुद्ध किया गया था. विश्वविद्यालय प्रशासन के संरक्षण में रेस्टोरेंट निर्माण की नींव रखी गई.
मनीष ने कहा कि लोकायुक्त के हसतक्षेप से मामले का पटाक्षेप हो सका है. बीएनएमयू प्रशासन इसे दबाने में लगी थी. एनएसयूआई तत्कालीन प्राचार्य द्वारा कॉलेज गेट को धस्त कर बगैर विश्वविद्यालय की अनुमति से भूमि अधिग्रहण कर रेस्टोंरेंट बनाए जाने का विरोध शुरू से कर रही है. एनएसयूआई ने मामले की शिकायत तत्कालीक कुलपति और विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकाियों से किया था.
लेकिन विश्वविद्यालय के तत्कालिक कुलपति भी इन भ्रष्ट प्राचार्यो के साथ अवैध निर्माण मे सहमति प्रदान किया. उन्होंने ने एमएलटी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य के संपूर्ण कार्यकाल की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की. मनीष ने कहा कि एमएलटी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने कई और काम अवैद्य रूप से किया था.
डॉ राजीव सिंहा ने तत्कालीन प्राचार्य केपी यादव को भी अवैध रूप से निर्माण में सहायक बनाया था. एनएसयूआई के राष्ट्रीय सयोजक मनीष कुमार ने बीएनएमयू प्रशासन से मांग किया है कि दोषी प्राचार्या को अविलंब निलंबित किया जाए और इनके संपूर्ण कार्यकाल की उच्च स्तरीय की जांच कि जाय और इस मामले मे पूर्व कुलपति कुलसचिव और प्रतिकुलपति की भूमिका की जांच हो नहीं तो एनएसयूआई आर पार की आंदोलन करेगी और उच्च न्यायालय में परिवाद दायर करेगी.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
बीएन मंडल विवि अन्तर्गत एमएलटी कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्यों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग एनएसयूआई ने की. साथ ही रेस्टोरेंट निर्माण मामले में विवि प्रशासन की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया है.
इस मामले में एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उक्त रेसटोरेंट्स का उद्घाटन तत्कालीन प्रतिकुलपति और कुलसचिव द्वारा करना काफी कुछ बयां कर रहा है. जबकि रेस्टोरेंट का निर्माण नियम परिनियम के विरुद्ध किया गया था. विश्वविद्यालय प्रशासन के संरक्षण में रेस्टोरेंट निर्माण की नींव रखी गई.
मनीष ने कहा कि लोकायुक्त के हसतक्षेप से मामले का पटाक्षेप हो सका है. बीएनएमयू प्रशासन इसे दबाने में लगी थी. एनएसयूआई तत्कालीन प्राचार्य द्वारा कॉलेज गेट को धस्त कर बगैर विश्वविद्यालय की अनुमति से भूमि अधिग्रहण कर रेस्टोंरेंट बनाए जाने का विरोध शुरू से कर रही है. एनएसयूआई ने मामले की शिकायत तत्कालीक कुलपति और विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकाियों से किया था.
लेकिन विश्वविद्यालय के तत्कालिक कुलपति भी इन भ्रष्ट प्राचार्यो के साथ अवैध निर्माण मे सहमति प्रदान किया. उन्होंने ने एमएलटी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य के संपूर्ण कार्यकाल की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की. मनीष ने कहा कि एमएलटी कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने कई और काम अवैद्य रूप से किया था.
डॉ राजीव सिंहा ने तत्कालीन प्राचार्य केपी यादव को भी अवैध रूप से निर्माण में सहायक बनाया था. एनएसयूआई के राष्ट्रीय सयोजक मनीष कुमार ने बीएनएमयू प्रशासन से मांग किया है कि दोषी प्राचार्या को अविलंब निलंबित किया जाए और इनके संपूर्ण कार्यकाल की उच्च स्तरीय की जांच कि जाय और इस मामले मे पूर्व कुलपति कुलसचिव और प्रतिकुलपति की भूमिका की जांच हो नहीं तो एनएसयूआई आर पार की आंदोलन करेगी और उच्च न्यायालय में परिवाद दायर करेगी.
(रिपोर्ट:- ईमेल)








