मधेपुरा: वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर द्वारा विगत दिनों कुलाधिपति सह राज्यपाल को पत्र लिख भूपेंद्र नारायण विश्वविद्यालय में पीएचडी से जुड़े प्री सबमिशन, सबमिशन में रिफ्रेशमेंट और लंच के नाम पर शोधार्थियों के खुलेआम शोषण की शिकायत मामले में लोकभवन ने संज्ञान लिया है. राज्यपाल के अपर सचिव डॉक्टर नंदलाल आर्य ने बीएनएमयू कुलपति को पत्रांक बी एन एम यू/7/2026/499 के भेजे पत्र में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए आवेदक और राजभवन को सूचित करने का निर्देश जारी किया है. ज्ञातव्य हो कि लिखे पत्र में डॉक्टर राठौर ने लिखा था कि एक ओर जहां शोधार्थी शोध के क्रम में आर्थिक,मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका होता है वैसे में रिफ्रेशमेंट और भोजन के नाम पर यह दबाव शोधार्थी का मानसिक और आर्थिक शोषण का द्योतक है. ज्ञातव्य हो कि शोधार्थियों को नाश्ते के नाम पर लाखों रुपए वेतन पाने वाले प्राध्यापकों द्वारा जहां 25 से 100 पैकेट नाश्ता तक की व्यवस्था करवाई जाती है वहीं भोजन के नाम पर 15 से 30 प्लेटों की व्यवस्था करनी पड़ती है. इस संबंध में डॉक्टर राठौर ने लोकभवन को बिंदुवार शिकायत की थी. इतना ही नहीं डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने पत्र में यह भी शिकायत किया था कि सर्वाधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह भी है कि इसमें प्रायः खास रेस्टोरेंट तक का खाना अनिवार्य कर दिया जाता है. खाने के नाम पर अधिकांश अवसरों पर मछली, चिकन और मटन फ्राई संग लजीज भोजन की एक साथ व्यवस्था करनी पड़ती है. चाय, पानी, कोल्ड्रिंक्स आदि की चर्चा ही क्या करनी. अक्सर इसमें शोधार्थी को 20000 से 35000 (बीस से पैंतीस हजार)तक का अतिरिक्त खर्च आ जाता है जिसमें कई शोधार्थी कर्ज तक लेकर एडजेस्ट करते हैं. यह किसी भी स्तर पर शोभनीय नहीं है बल्कि पूरी तरह शिक्षक के आचरण के विपरीत है. कई बार शोधार्थियों के द्वारा असमर्थता दर्शाने पर उसे हिदायत तक दे दी जाती है कि यह परम्परा है करना ही होगा.
रिफ्रेशमेंट और लंच के नाम पर शोधार्थियों के शोषण पर राठौर ने सख्ती से रोक की उठाई थी मांग
अपने पत्र के माध्यम से डॉक्टर राठौर ने महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल से मांग किया था कि अपने स्तर से अविलंब ऐसे घृणित कृत्य पर रोक लगाते हुए ऐसे अवसरों पर जरूरी होने पर विभाग द्वारा चाय,पानी और बिस्किट की व्यवस्था हो जो व्यवहारिक भी प्रतीत होती है क्योंकि शोधार्थियों से सबमिशन फीस पंद्रह हजार में इन चीजों से जुड़ी भी राशि ली जाती है. वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉक्टर राठौर ने कहा कि कुलाधिपति कार्यालय द्वारा इसमें संज्ञान लेने से यह उम्मीद जगी है कि विश्वविद्यालयों में ऐसी परम्पराओं पर रोक लगेगी.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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