होली में रंगों से सेहत का रखें ख्याल - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

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6 मार्च 2020

होली में रंगों से सेहत का रखें ख्याल

मधेपुरा
होली एक तरफ जहां खुशियों का त्योहार है, वहीं दूसरी तरफ थोड़ी सी लापरवाही आपको जिंदगी भर का दुख दे सकती है. इसलिए होली खेलें लेकिन थोड़ी सावधानी बरतते हुए. क्योंकि आपकी सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.
                        होली खेलते समय लोग इतने में मग्र हो जाते हैं कि उन्हें किसी चीज का होश नहीं रहता. ऐसे में होली खेलते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. अगर आप कुछ भी खाने से पहले कीटाणुनाशक साबुन से हाथ धोने की आदत डाल लेते हैं, तो आप कई बीमारियों से बचे रह सकते हैं. आप भी अपने परिवार के सदस्यों के साथ होली को मस्ती के साथ मनाना चाहते हैं, लेकिन होली की मस्ती में भंग यानी बाधा न पड़े, तो फिर आपको और परिवार के सदस्यों को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा.
                                 अक्सर ऐसा देखने व सुनने में आया है कि होली और इसके बाद लोगों का पेट खराब हो जाता है. कोई डायरिया का शिकार हो गया तो कोई गैस्ट्राइटिस का, तो कोई एसीडिटी और गैस का. आइये जानते हैं एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट बिश्केक किर्गिस्तान से एमबीबीएस कर रही खगड़िया की डॉ शालू शुभम से कि क्‍या करें. होली के बाद लोगों के बीमार होने के कई कारण हैं. होली पर महिलाएं परिवार के लिए गुझियां, नमकीन और विविध प्रकार के पकवान बनाती हैं.
                          इन पकवानों को बनाते समय और बाद में इनकी पैकिंग करते समय हाथों को स्वच्छ रखने की जरूरत होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि अस्वच्छ हाथ जीवाणुओं के वाहक होते हैं. अब होली का दिन है, कोई न कोई तो मिलने आएगा ही अगर रंगों से होली न खेली जाए, तो अबीर और गुलाल (जिनमें लेड और केमिकल का अंश होता है,जो शरीर के लिए नुकसानदेह होते हैं ) तो लगाना पड़ता है.
                                 अगर बच्चों की मां के हाथ स्वच्छ और जीवाणुरहित नहीं होंगे, तो उनके द्वारा बनायी गयी वस्तुएं भी अस्वच्छ हो सकती हैं. इसलिए बेहतर यही रहेगा कि महिलाएं कोई भी वस्तु तैयार करने से पहले जीवाणुनाशक साबुन से हाथ जरूर धो लें. केमिकल कलर में नुकसानदेह तत्व पाए जाते हैं. अब अगर रंग लगे हाथों से किसी वयस्क या बच्चे ने गुझिया या कोई अन्य खाद्य वस्तु खा ली, तो फिर केमिकल कलर का अंश पेट के अंदर चला जाता है, जो कालांतर में पेट की समस्या का कारण बन सकता है.
                                  अगर केमिकल कलर के बजाय हर्बल कलर का इस्तेमाल करें, तो यह सेहत के लिए अच्छा रहेगा. एशियन मेडिकल इंस्टिट्यूट बिश्केक रसिया से एमबीबीएस कर रही खगड़िया की डॉ शालू शुभम का कहना है कि अगर हम हाथों की सफाई (हैंड हाईजीन) पर ध्यान दें, तो डायरिया, गैस्ट्राइटिस, एसीडिटी, गैस, गैस्ट्रोइसोफेगियल रीफ्लक्स डिजीज (जी ई आर डी) और कोलाइटिस आदि रोगों से बच सकते हैं. जरूरत इस बात पर अमल करने की है कि कोई भी खाद्य पदार्थ खाने से पहले हम जीवाणुनाशक साबुन से हाथ जरूर धोएं.

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