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मधेपुरा: जिला में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों, दुर्लभ अभिलेखों एवं ग्रंथों के वैज्ञानिक संरक्षण एवं डिजिटलीकरण का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य जिले की समृद्ध ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है. जिला कला एवं सांस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली कुमारी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्य के सफल क्रियान्वयन हेतु उप विकास आयुक्त अनिल बसाक की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो इस अभियान के संचालन एवं निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. मधेपुरा प्राचीन काल से ज्ञान, दर्शन, साहित्य एवं संस्कृति का केंद्र रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में विशेष अभियान चलाकर मठ, मंदिर, शैक्षणिक संस्थान, पुस्तकालय एवं निजी संगठनों/व्यक्तियों से 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों एवं ग्रंथों की पहचान एवं सूचीकरण किया जाएगा. उन्होंंने बताया कि इस अभियान की विशेषता यह है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था के पास ही सुरक्षित रहेगा.

केवल उनका डिजिटलीकरण कर सुरक्षित अभिलेखीकरण किया जाएगा, जिससे उनकी मौलिकता एवं स्वामित्व दोनों संरक्षित रहेंगे. जिला स्तर पर तैयार सूची को संस्कृति विभाग, बिहार के अधीन बिहार राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित किया जाएगा, जिससे इन अमूल्य धरोहरों को न केवल संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि शोधार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए भी सुलभ बनाया जा सकेगा. इस पहल से मधेपुरा की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी तथा यह जिले की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा. गठित समिति में अनुमंडल पदाधिकारी, मधेपुरा संतोष कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, उदाकिशुनगंज पंकज घोष, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा), प्रभारी पदाधिकारी (अभिलेखागार) सहित साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारियों को सदस्य के रूप में नामित किया गया है.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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