मधेपुरा
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 22 फरवरी को आयोजित सीनेट की बैठक का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
इस बैठक के पूर्व विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अराजकता के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया और बैठक के दौरान कई सदस्यों ने सीधे-सीधे कुलपति पर यह आरोप लगाया कि वे विश्वविद्यालय को चलाने में अक्षम हैं.
बैठक के बाद कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद ने जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर से कारणपृच्छा कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. कुलसचिव ने 24 फरवरी को पत्र जारी कर पीआरओ से शोकॉज पूछा है कि वे सीनेट की बैठक के दिन बिना सूचना के अपने कार्य से अनुपस्थित रहे.
इस संबंध में सूचना विश्वविद्यालय या विभागाध्यक्ष को नहीं दी गई, जो कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही का द्योतक है. इस मामले में उनसे तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है. मालूम हो कि बीएनएमयू लेटलतीफी के लिए जाना जाता है.
लेकिन उक्त मामले में विश्वविद्यालय और कुलसचिव की तत्परता संदेह पैदा करती है. शनिवार को सीनेट की बैठक थी और अगले दिन रविवार की छुट्टी थी. इसके बावजूद सोमवार को यह पत्र जारी हो गया, जबकि उस दिन कुलपति मुख्यालय से बाहर थे.
शायद कुलपति ने सीनेट की बैठक के बाद तुरंत पीआरओ को शोकॉज करने का आदेश दिया या कुलसचिव ने कुलपति का आदेश देना जरूरी नहीं समझा.
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 22 फरवरी को आयोजित सीनेट की बैठक का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
इस बैठक के पूर्व विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अराजकता के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया और बैठक के दौरान कई सदस्यों ने सीधे-सीधे कुलपति पर यह आरोप लगाया कि वे विश्वविद्यालय को चलाने में अक्षम हैं.
बैठक के बाद कुलसचिव डॉ. कपिलदेव प्रसाद ने जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर से कारणपृच्छा कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. कुलसचिव ने 24 फरवरी को पत्र जारी कर पीआरओ से शोकॉज पूछा है कि वे सीनेट की बैठक के दिन बिना सूचना के अपने कार्य से अनुपस्थित रहे.
इस संबंध में सूचना विश्वविद्यालय या विभागाध्यक्ष को नहीं दी गई, जो कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही का द्योतक है. इस मामले में उनसे तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है. मालूम हो कि बीएनएमयू लेटलतीफी के लिए जाना जाता है.
लेकिन उक्त मामले में विश्वविद्यालय और कुलसचिव की तत्परता संदेह पैदा करती है. शनिवार को सीनेट की बैठक थी और अगले दिन रविवार की छुट्टी थी. इसके बावजूद सोमवार को यह पत्र जारी हो गया, जबकि उस दिन कुलपति मुख्यालय से बाहर थे.
शायद कुलपति ने सीनेट की बैठक के बाद तुरंत पीआरओ को शोकॉज करने का आदेश दिया या कुलसचिव ने कुलपति का आदेश देना जरूरी नहीं समझा.









