मधेपुरा: बिहार में लगभग एक लाख प्रारंभिक शिक्षकों की और छठे चरण के तीस हजार माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पिछले कई बर्षों से अधर में लटका हुआ है. हज़ारों नियोजन इकाई में आवेदन के बाद मेधा सूची निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी थी. मेधा सूची प्रक्रिया के दौरान ही शिक्षक भर्ती का मुद्दा बिहार सरकार के द्वारा रोक दिया गया. ऐसे में कई महीने बीतने के पश्चात भी इस पर ठोस निर्णय नहीं आने के कारण बहाली को पुनः प्रारंभ करने के मुद्दे को लेकर राज्य भर के शिक्षक अभ्यर्थी द्वारा ट्विटर कैंपेन चलाया गया हैै.
शिक्षक भर्ती के इस मुहिम को ट्विटर पर आठ लाख से अधिक लोगों का समर्थन हासिल हुआ(समाचार पत्र छपने तक). पूरे दिन यह मुद्दा भारत में प्रथम स्थान पर #Bihar_Needs_Teachers ट्रेंड करता रहा. भारत मे यह मुद्दा टॉप 5 में सफर करता रहा. 2019 में 37000 रिक्तियों के लिए एसटीइटी परीक्षा हुई और इसका रिजल्ट भी विगत मार्च माह में दे दिया गया कुछ विषयों को छोड़कर भी भी सरकार बहाली के दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है इन्हीं सब बातों को लेकर अभ्यर्थियों में काफी आक्रोश सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ दिखा.
इस कोरोना काल में शिक्षक अभ्यर्थी आर्थिक, मानसिक, और सामाजिक उत्पीड़न का दंश झेल रहे हैं यह बेरोजगारी किसी अभिशाप से कम नहीं है. कहने को तो बिहार सरकार प्रत्येक पंचायत में मिडिल स्कूल को अपग्रडे कर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल खोल दिया है लेकिन उनमें एक भी शिक्षक नहीं है, क्या विद्यालय खोलने से ही बच्चों के भविष्य संवर जाएंगे, उसमें तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की बहाली भी होनी चाहिए.
बिहार टीईटी/सीटीईटी एवं एसटीईटी शिक्षक बहाली मोर्चा के जिलाध्यक्ष रणधीर कुमार ने सरकार पर जान बूझकर मामलें को अटकाने का आरोप लगाते हुए कहा की सरकार बहाली के प्रति पुरी तरह उदासीन है. बतातें चले कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के आलोक में राज्य में छात्र - शिक्षक अनुपात 30:1 होनी चाहिए,लेकिन बिहार में शिक्षकों के लाखों पद रिक्त हैं और सरकार इसके प्रति गम्भीर नहीं है. सरकार की उदासीनता से राज्य के बच्चों के शैक्षिक अधिकार का हनन हो रहा हैै.
बिहार के छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने से वंचित होते जा रहें. अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील किया है कि अब शिक्षा विभाग के कार्यालय खुल रहें हैं तो राज्य सरकार को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर शीघ्र विचार करनी चाहिए. सरकार की उदासीनता इसी तरह से जारी रही तो लॉक डाउन समाप्ति उपरांत शिक्षक अभ्यर्थी मजबूर होकर सड़क पर उतरने को बाध्य होगें. जिलाध्यक्ष रणधीर कुमार ने बताया कि आज के ट्वीटर कैम्पेन को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने ट्वीटर हेंडिल से समर्थन किया एवं नीतीश सरकार से कई सवाल पूछा है. अन्य नेताओं ने भी समर्थन किया है.
अभ्यर्थी सह शिक्षक बहाली मोर्चा के सोशल मीडिया प्रभारी सारंग तनय ने कहा कि शिक्षक अभ्यर्थी 2012 से एसटीईटी एवं 2017 से ही बिहार टीईटी/सीटेट क्वालीफाई कर बेरोजगार बैठे हैं, लेकिन सरकार को उनकी कोई फिक्र नहीं है. देश मे सबसे ज्यादे शिक्षकों के पद बिहार में ही हैं लेकिन बेहद शर्मनाक है कि 2015 के बाद अब तक शिक्षकों की बहाली नहीं हो सकी है. सारंग तनय ने कहा कि राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण बिहार की अधिकतर भर्तियां कोर्ट में ही लटक जाती है. उनका कहना है कि आखिर बहाली प्रक्रिया में ऐसा क्या लूपहोल छोड़ दिया जाता है कि मामले सालों तक अदालतों में लंबित रह जाते हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी कारण बस मुकदमा हो भी जाए तो उसका त्वरित निष्पादन नहीं किया जाता है.
इस भर्ती में भी सरकार ब्लाइंड फेडरेशन केस के मामले में त्वरित निष्पादन नहीं कर रही है. अगर राज्य सरकार वाकई शिक्षक भर्ती को लेकर गंभीर है तो ब्लाइंड केस के मामले में स्पेशल मैंशनिंग करा कर अर्जेंट हायरिंग क्यों नहीं करवा रही?सारंग तनय ने कहा कि एसटीईटी 2019 की परीक्षा ऑनलाइन मोड में 37000 पदों के लिए सितंबर 2020 में ली गई, एवं 12 मार्च 2021 को तीन विषय को छोड़कर रिक्ति के अनुसार ही रिजल्ट जारी किया गया बिहार बोर्ड के द्वारा. अब सरकार उस फ्रेश बहाली को भी सातवां चरण के नाम पर लटकाना चाहती है, जबकि जितनी रिक्तियां है उतने ही रिज़ल्ट जारी की गई है, फिर शिक्षा विभाग को बहाली करने में क्या दिक्कत हैै.
नीतीश सरकार एसटीईटी 2019 की भी अबिलम्ब बहाली करावें. रणधीर कुमार जिला अध्यक्ष शिक्षक बहाली मोर्चा, आभाष कुमार जिला संयोजक, अनिल कुमार जिला महासचिव, बबलू कुमार कोषाध्यक्ष, आनंद भूषण प्रमंडलीय अध्यक्ष, शब्बीर आलम उपाध्यक्ष, बृजेश रंजन मीडिया प्रभारी, गौतम कुमार, हरिश्चंद्र कुमार, मुन्ना कुमार, संतोष कुमार, कुंदन कुमार कुदरत, रतन कुमार, दिलीप कुमार दिल, आलोक कुमार, मनोज कुमार, कार्तिक कुमार, तेज नारायण कुमार, अभिनंदन कुमार, पूजा प्रिया, सोनी राज, ललन कुमार, सौरभ कुमार, विनोद कुमार, नीलू कुमारी, ई. प्रिती सागर, निक्की कुमारी, दिलीप कुमार दिल, रंजन यादव, अभिषेक यादव, कंचन माला, सोनी कुमारी, शबनम कुमारी, रंम्भा कुमारी, काजल कुमारी सविता कुमारी, सुमन कुमार, मनीष कुमार, अरमान अली,अजीत कुमार, जयशंकर प्रसाद, तरूण कुमार, रामनरेश यादव, मंतोष कुमार प्रवीण कुमार, पंकज कुमार, पंकज पथिक, रामाषिश कुमार, रंजीत कुमार, अनिल कुमार, अजीत कुमार, अमित कुमार, पिंटु कुमार, इत्यादि.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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