छात्रों के धैर्य की सीमा का बांध टूटने से पहले समुचित व्यवस्था कर स्वदेश लाए सरकार: पूर्व मंत्री - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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16 जुलाई 2020

छात्रों के धैर्य की सीमा का बांध टूटने से पहले समुचित व्यवस्था कर स्वदेश लाए सरकार: पूर्व मंत्री

मधेपुरा: किर्गिस्तान के चार शहरों में मेडिकल की पढ़ाई करने गए बिहार के लगभग 1000 छात्र-छात्राएं अपनी वापसी को लेकर चिंतित हैं. वहाँ फंसे छात्र-छात्राओं के मुताबिक बाँकी राज्यों के छात्र-छात्राएं करीब-करीब अपने घर लौट चुके हैं. ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राएं लगातार दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से छात्रों को बिहार वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने से छात्रों के धैर्य की सीमा का बांध टूटता जा रहा है.

इधर, बिहार में रह रहे अभिभावकों की चिंताएं अब और ज्यादा बढ़ गई है. लगातार बच्चों द्वारा कभी बिहार के राज्यपाल को पत्र लिखकर, तो कभी बिहार डीजीपी के व्हाट्सएप पर मैसेज कर वतन वापसी के लिए गुहार भी लगा रहे हैं. इतनी ही नहीं बच्चों ने तो देश के प्रधान मंत्री को भी ट्वीट कर वतन वापसी की गुहार लगाई. मालूम हो कि किर्गिस्तान के एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट, ओएसएच मेडिकल यूनिवर्सिटी एवं जलालाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी में मधेपुरा के कई विद्यार्थी पढ़ते हैं. 
आयोजित परीक्षाओं के कारण वे पहले वापस नहीं आ सके थे. अब परीक्षाएँ खत्म हो गई हैं तो वतन वापसी मुश्किल हो गई है. किर्गिस्तान में फंसे छात्रों की वापसी के लिए मधेपुरा सदर विधायक सह पूर्व मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने बिहार के मुख्यमंत्री सहित भारतीय दूतावास किर्गिस्तान को पत्र लिखकर छात्रों को वतन वापस लाने की मांग की है.
प्रो चंद्रशेखर ने बताया कि किर्गिस्तान के एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट, जलालाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी, ओएसएच मेडिकल यूनिवर्सिटी में मधेपुरा सहित पूरे बिहार के लगभग 1000 छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. जो कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गए लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं लौट पा रहे हैं और वापस लौटना चाहते हैं. विधायक ने बताया कि जबकि बिहार छोड़कर अन्य राज्यों के बच्चे वापस वतन लौट चुके हैं.

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