इधर, एचएम संजय प्रताप ने मारपीट के आरोप को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि उनकी सर्विस बुक पिछले आठ महीने से स्थापना शाखा में रखी हुई है. उन्होंने सर्विस बुक को आपत्ति निराकरण के लिए लेखा शाखा में भेजने का आग्रह किया था. इसी बात को लेकर सहायक कर्मचारी के साथ नोकझोंक हुई थी. जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि कार्यालय में सहायक कर्मचारी के साथ मारपीट किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य विद्यालय उदा बालक के प्रधानाचार्य संजय प्रताप को निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि एचएम को किसी तरह की समस्या थी तो उन्हें सीधे स्थापना डीपीओ या जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलकर अपनी बात रखनी चाहिए थी. कार्यालय में कर्मचारी के साथ मारपीट करना गंभीर मामला है.
पूर्व में भी हो चुकी है विभागीय कार्रवाईबता दें कि संजय प्रताप पूर्व में भी विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके हैं. कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, उदाकिशुनगंज के तत्कालीन संचालक रहते हुए उनके खिलाफ छात्राओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे. मामले की जांच के लिए विभाग ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की थी. जांच के दौरान छात्राओं की स्वास्थ्य जांच, आवागमन पंजी के संधारण, नामांकन एवं उपस्थिति समेत कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे. छात्राओं के वीडियो बनाए जाने और राशन व्यवस्था से संबंधित आरोप भी सामने आए थे. जांच के बाद विभाग ने उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय के संचालक पद से कार्यमुक्त कर स्पष्टीकरण मांगा था. इसके बाद विद्यालय का प्रभार कुमारी शोभा साहू को सौंपा गया था.
इसके अलावा, हाल ही में डीएम की सहमति से उनका स्थानांतरण मध्य विद्यालय बालक, उदाकिशुनगंज से उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोतैली पासवान टोला, उदाकिशुनगंज किया गया था. बताया गया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) द्वारा विरमित किए जाने के बावजूद उन्होंने नए विद्यालय में योगदान नहीं किया. इसे विभागीय आदेश की अवहेलना मानते हुए उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी. सदर थानाध्यक्ष विमलेन्दू कुमार ने बताया कि सहायक कर्मचारी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब देखना यह है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस इस मामले में आरोपी प्रधानाध्यापक के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई करती है. क्या पुलिस मामले में शीघ्र गिरफ्तारी करती है या फिर जांच की प्रक्रिया लंबी खिंचती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
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