मधेपुरा: दसवीं के इम्तिहान. कौन भूले होंगे भला ?? प्रायः फरवरी का अंतिम सप्ताह या मार्च की शुरुआत. ये मौसम जैसे पूरे साल के सबसे सुस्त दिनों की आमद. समय जैसे रेंग रहा है. टाइम टेबल, लास्ट ईयर के प्रश्न पत्र, महत्वपूर्ण प्रश्न, किस चेप्टर से कितने नम्बर कवर होंगे? लोग कहते है बंसत ऋतु चल रही है. बहारों का मौसम है लेकिन छात्रों से पूछो कितने मनहूस लगते हैं ये दिन. उड़े उड़े से ख्याल, ठहरी दोपहर, उजाड़ सुस्त शामें. प्रिपरेशन लिव लग चुकी होती है.
टीवी के सामने पल भर भी ठहरने पर घर वाले दुश्मन की नजर से देखने लगते हैं. स्कूल में सभी बच्चों को दसवीं के एग्जाम का प्रवेशपत्र लेने बुलाया गया था. हमलोगों का स्कूल में अंतिम दिन क्योंकि परीक्षा के लिए सेंटर बदले जाते हैं इसलिए परीक्षा देने दूसरे स्कूल जाएंगे. स्कूल प्रांगण में अंतिम दिन था, इस बिल्डिंग में स्कूल यूनिफार्म पहने दोस्तों के साथ अंतिम पल, बिछड़ने की आहट. स्कूल का आखरी साल और साल का अंतिम दिन...
कच्ची उम्र में भीतर कुछ चटक जाने का, बिखर जाने का पहला आभास. इस तस्वीर में स्कूल ड्रेस बयाँ कर रही है उल्लास है एक लंबे परिश्रम के फलीभूत होने की निकट घड़ी का लेकिन टिस है ढेरों अजीज रिश्तों की बिदाई का. याराने वाली सारी भावुक बातें इस ईमारत के दीवारें में छूट जाएंगी, महीने में एक बार सभी के मिलने की भावी योजनाएं धरी रह जाएंगी. अलग अलग कालेज, अलग अलग शहर की राह पकड़ लेंगे. फिर किसी नए शैक्षणिक संस्थान की ईमारत, काउंसलिंग के कॉल, कट आउट लिस्ट, एडमिशन फार्म, नए रूममेट, नए दोस्त, नए शिक्षक.
दसवीं के अंतिम दिन परीक्षा का प्रवेश पत्र मिलने के बाद फिर पूरी ईमारत में घूम घूमकर शिक्षकों के पैर छूकर आशीर्वाद ले रहा था. आखिरी दिन प्रवेशपत्र लेने जाने पर स्कूल यूनिफार्म में अनुशासन की कमी अलग दिखती है. कौन टाई बाँधे, जूतों पर पालिश नही. दसवीं की परीक्षा जहाँ एक नई दुनिया के दरवाज़े खोलती है वही दूसरी तरफ़ भीतर ही भीतर बहुत कुछ छूट जाने की विवशता भी लाती है. छूट जाती है प्रेयर वाली लाइन, ब्रेक टाइम, स्कूल बैग यूनिफार्म और वो पुरानी ईमारत. तमाम उम्र के लिए कभी न भुला पाने वाली याद, खुशमिजाज चेहरे और शरारते.
(डेविड)
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