सीमा कुमारी के पिता परमेश्वर साह गांव में कपड़े की एक छोटी दुकान चलाते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य को हमेशा प्राथमिकता दी. माता शीला देवी और पिता परमेश्वर साह ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटे और बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने बेटा-बेटी में कभी अंतर नहीं किया और सीमा को अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग दिया. पिता परमेश्वर साह के लिए बेटी की यह उपलब्धि जीवन का बेहद गौरवपूर्ण पल है. उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया, लेकिन यह कल्पना नहीं की थी कि एक दिन वह पुलिस की वर्दी पहनकर डीएसपी बनेगी और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन करेगी. बेटी की इस सफलता ने उनके वर्षों के त्याग, संघर्ष और उम्मीदों को सार्थक कर दिया है.
गांव के स्कूल से नवोदय विद्यालय तक का सफरसीमा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय में हुई. बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाली सीमा ने अपनी प्रतिभा के बल पर जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला हासिल किया. वहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने दरभंगा से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था. अपने सपने को साकार करने के लिए वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने दिल्ली चली गईं. वहां उन्होंने पूरी एकाग्रता, अनुशासन और निरंतरता के साथ तैयारी की. तैयारी के दौरान उनका पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहा. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और 70वीं बीपीएससी परीक्षा के पहले ही प्रयास में 116वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद के लिए चयनित हो गईं.
पहले प्रयास में सफलता से बढ़ाया बेटियों का आत्मविश्वाससीमा की सफलता केवल एक परीक्षा में मिली उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन तमाम बेटियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की कहानी है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखती हैं. उन्होंने यह साबित किया है कि सफलता के लिए बड़े शहर या संपन्न परिवार में जन्म लेना जरूरी नहीं है. यदि परिवार का सहयोग, शिक्षा के प्रति समर्पण और लक्ष्य हासिल करने का दृढ़ संकल्प हो, तो गांव की बेटियां भी ऊंचे मुकाम तक पहुंच सकती हैं. आज सीमा राजगीर में डीएसपी पद का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वह पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी. उनकी इस उपलब्धि से ब्रह्मपुर कटवारा सहित पूरे दरभंगा क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. सीमा की कहानी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि बेटियों को शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर दिए जाएं. परिवार का विश्वास और सहयोग मिलने पर बेटियां न केवल अपने सपनों को साकार कर सकती हैं, बल्कि परिवार, गांव और समाज की पहचान भी बन सकती हैं.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....












