सपने हुए चुर चुर, सपने को यूँ बिखरता देख उसे समेटने में लग गए - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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21 सितंबर 2015

सपने हुए चुर चुर, सपने को यूँ बिखरता देख उसे समेटने में लग गए

10 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद रोज 50 रूपए कमाने वाले कृष्ण कुमार को इस बात का अंदाजा भी न था, कि उनका 4 हजार रूपए का पुराना टाइप राईटर मित्र पुलिस की एक लात भी न झेल पायेगा. लेकिन उन्होंने दुबारा कोशिश की और गरीबी की चादर ओढ़ते हुए कहा साहब माफ़ कर दो, लेकिन साहब के कंधो पर लगे सितारों की चमक इतनी तेज थी कि उस गरीब की आँखों में आये आंसुओं की चमक फीकी पड़ गयी. साहब ने अपने मजबूत हाथ एक झटके से टाइप राईटर को उठाकर फेंक दिया. दूर गिरा टाइप राईटर किसी गरीब के सपनों की तरह टूट कर बिखर गया. 65 वर्षीय कृष्ण कुमार अपने सपने को यूँ बिखरता देख उसे समेटने में लग गए, लेकिन मानो वहां टूटा पड़ा हर टुकड़ा चीख चीख कर कह रहा था कि अब हम नही जुड़ेंगे. जब उनसे पूछा कि अब क्या करेंगे तो उन्होंने कहा कि पिछले 35 साल से यही काम कर रहा हूँ और बहुत कुछ अपनी आँखों के सामने बदलते देखा, लेकिन अब शायद खुद को बदलने की जरुरत है, अब हिंदी के तरह मेरे टाइप राइटर की भी देश को जरुरत नही है। ये कहते हुए वह अपने टूटे टाइप राईटर को निहारने लगे.

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