मुरलीगंज: मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत पकिलपार गांव में हरिपुर कला पंचायत के मुखिया डॉ लक्ष्मी कुमारी ने मनरेगा योजना के तहत पशु शेड का निर्माण कार्य शुरू किया. यह सड़क 150343 रुपये से निर्माण होगा. गरीब कल्याण योजना के तहत नंदन यादव के दरवाजे पर शिलान्यास किया गया.
इस दौरान मुखिया डॉ. लक्ष्मी कुमारी ने कहा कि पशु के लिए पक्की जमीन नहीं होने के कारण कई तरह की बीमारियां पशु को हो जाती है. इसके लिए पशु शेड निर्माण से पशुपालकों को काफी फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा कि पूरे गांवों में मनरेगा के तहत मवेशी शेड बनाएं जायेंगे. जिला प्रशासन से मांग को लेकर डेयरी व्यवसाय बढ़ावा देने के लिए उचित कदम उठाया है.
उन्होंने बताया कि जिले में मनरेगा योजना के तहत गांवों में मवेशी शेड बनाए जा रहे हैं. ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने मवेशी शेड बनाने के लिए मनरेगा योजना के तहत यह कार्य शुरू की है. पशुओं को एक स्थान पर रखने के लिए पशुशाला स्थापित की गई है, जिसने गांव की सूरत बदलेगी गांव में स्वच्छता के साथ पशुपालकों को आर्थिक समृद्धि आएगी.
उन्होंने कहा कि डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एससी एसटी की विधवाएं जिनमें छोटे और सीमित किसान शामिल होंगी. जिन लोगों के पास मवेशी हैं और उनके पास कोई स्थायी शेड नहीं है. वह इस योजना का लाभ ले सकते हैं. मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
किन पशुपालकों को मिलेगा फायदा
मनरेगा के तहत अब प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों को निजी भूमि पर पशु शेड का लाभ मिलेगा. पशुपालकों को यह लाभ पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दिया जाएगा. योजना का लाभ पाने के लिए पशुपालकों के पास कम से कम तीन पशु होना अनिवार्य होगा. इसमें दो प्रकार के पशुपालकों को लाभ दिए जाने की योजना है.
जिसमें तीन पशु वाले पशुपालकों को पशु शेड के तहत उनकी निजी भूमि पर शेड, नाद, फर्श व यूरिनल ट्रैक निर्माण पर उन्हें मनरेगा के माध्यम से 80 हजार रुपए तथा छह पशु वाले पशुपालकों को उक्त निर्माण कार्य के लिए एक लाख 60 हजार के आसपास खर्च किए जाएंगे. पशुपालकों को अपनी निजी भूमि पर इसका निर्माण करवाना होगा.
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
इस दौरान मुखिया डॉ. लक्ष्मी कुमारी ने कहा कि पशु के लिए पक्की जमीन नहीं होने के कारण कई तरह की बीमारियां पशु को हो जाती है. इसके लिए पशु शेड निर्माण से पशुपालकों को काफी फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा कि पूरे गांवों में मनरेगा के तहत मवेशी शेड बनाएं जायेंगे. जिला प्रशासन से मांग को लेकर डेयरी व्यवसाय बढ़ावा देने के लिए उचित कदम उठाया है.
उन्होंने बताया कि जिले में मनरेगा योजना के तहत गांवों में मवेशी शेड बनाए जा रहे हैं. ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने मवेशी शेड बनाने के लिए मनरेगा योजना के तहत यह कार्य शुरू की है. पशुओं को एक स्थान पर रखने के लिए पशुशाला स्थापित की गई है, जिसने गांव की सूरत बदलेगी गांव में स्वच्छता के साथ पशुपालकों को आर्थिक समृद्धि आएगी.
उन्होंने कहा कि डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एससी एसटी की विधवाएं जिनमें छोटे और सीमित किसान शामिल होंगी. जिन लोगों के पास मवेशी हैं और उनके पास कोई स्थायी शेड नहीं है. वह इस योजना का लाभ ले सकते हैं. मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
किन पशुपालकों को मिलेगा फायदा
मनरेगा के तहत अब प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों को निजी भूमि पर पशु शेड का लाभ मिलेगा. पशुपालकों को यह लाभ पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दिया जाएगा. योजना का लाभ पाने के लिए पशुपालकों के पास कम से कम तीन पशु होना अनिवार्य होगा. इसमें दो प्रकार के पशुपालकों को लाभ दिए जाने की योजना है.
जिसमें तीन पशु वाले पशुपालकों को पशु शेड के तहत उनकी निजी भूमि पर शेड, नाद, फर्श व यूरिनल ट्रैक निर्माण पर उन्हें मनरेगा के माध्यम से 80 हजार रुपए तथा छह पशु वाले पशुपालकों को उक्त निर्माण कार्य के लिए एक लाख 60 हजार के आसपास खर्च किए जाएंगे. पशुपालकों को अपनी निजी भूमि पर इसका निर्माण करवाना होगा.
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....










