सहरसा: विवेकानंद शिक्षा जागृति युवा मंच के तत्वावधान में सहरसा स्थित एफवाईआई चाय बार में बैठक का आयोजन किया गया. बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्था के संरक्षक सह अध्यक्ष चितेश कुमार मिश्रा ने कहा कि संस्था द्वारा 24 जनवरी को "बेटी - एक वरदान" कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी.
इस कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्र की निर्धन मेधावी बेटियों के उच्च माध्यमिक स्तर तक की बेहतर शिक्षा की व्यवस्था करने के साथ- साथ भविष्य में वयस्क हो जाने पर उसके विवाह के खर्च का भी निर्वहन संस्था द्वारा ही किया जाएगा. इसके लिए योग्य छात्राओं का चयन मौखिक जाँच परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. जिसकी उम्र सीमा 6-8 वर्ष होगी.
बैठक को संबोधित करते हुए रोटी बैंक सहरसा के रौशन भगत ने संस्था के नेक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मात्र एक बेटी की सुशिक्षा में कई परिवार और समाज का कल्याण निहित होता है. इसलिए हमसबों का यह दायित्व है कि बेटियों को पढ़ने का समान अवसर दें.
वहीं कुणाल कश्यप ने बच्चों में क्रिएटिविटी बढ़ाने के प्रयासों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों में भी कला के विकास की अपार संभावनाएं हैं. बस जरूरत है तो उनलोगों को उचित अवसर उपलब्ध करवाने की. यदि समय- समय पर विभिन्न विधाओं के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया जाए तो वे छात्राएं हमारे समाज, जिले, राज्य का नाम कला के क्षेत्र में रौशन करेंगी.
वहीं मोनू झा ने इस मिशन में बेटियों को आगे आने की अपील की. बैठक में जिला महिला हेल्पलाइन की सदस्या मुक्ति श्रीवास्तव ने कहा कि आज भी हमारे समाज में लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता है. उनकी पढ़ाई को बाधित करने का जघन्य अपराध परिजनों के द्वारा किया जाता है. जो काफी चिंतनीय है. हमसबों को नारी शिक्षा के महत्व को समाज के जन- जन तक पहुंचाना होगा.
बिना लड़कियों की शिक्षा के बेहतर समाज की परिकल्पना करना बेईमानी है. युवा समाजसेवी शालिनी सिंह तोमर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमसबों का यह कर्तव्य है कि अपने घर- परिवार की लड़कियों की हिम्मत बढ़ाएँ वो कोख से बच आयी है तो दहेज से भी बच ही जायेगी. बस जरूरत है तो उनके सपनों को पंख देने की. अपनी पेंटिंग से आमलोगों के मन में जगह बनानेवाली सुश्री आकृति झा ने इस मिशन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर विशेष चर्चा की.
इस मीटिंग में अरविन्द कुमार, सुदर्शन कुमार ठाकुर, प्रीतमकौशिक, विकाश वर्धन एवं कुमार आनंद पाठक सहित अन्य सभी ने मिशन से सम्बंधित अपने विचारों को रखा.
इस कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्र की निर्धन मेधावी बेटियों के उच्च माध्यमिक स्तर तक की बेहतर शिक्षा की व्यवस्था करने के साथ- साथ भविष्य में वयस्क हो जाने पर उसके विवाह के खर्च का भी निर्वहन संस्था द्वारा ही किया जाएगा. इसके लिए योग्य छात्राओं का चयन मौखिक जाँच परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. जिसकी उम्र सीमा 6-8 वर्ष होगी.
बैठक को संबोधित करते हुए रोटी बैंक सहरसा के रौशन भगत ने संस्था के नेक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मात्र एक बेटी की सुशिक्षा में कई परिवार और समाज का कल्याण निहित होता है. इसलिए हमसबों का यह दायित्व है कि बेटियों को पढ़ने का समान अवसर दें.
वहीं कुणाल कश्यप ने बच्चों में क्रिएटिविटी बढ़ाने के प्रयासों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों में भी कला के विकास की अपार संभावनाएं हैं. बस जरूरत है तो उनलोगों को उचित अवसर उपलब्ध करवाने की. यदि समय- समय पर विभिन्न विधाओं के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया जाए तो वे छात्राएं हमारे समाज, जिले, राज्य का नाम कला के क्षेत्र में रौशन करेंगी.
वहीं मोनू झा ने इस मिशन में बेटियों को आगे आने की अपील की. बैठक में जिला महिला हेल्पलाइन की सदस्या मुक्ति श्रीवास्तव ने कहा कि आज भी हमारे समाज में लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया जाता है. उनकी पढ़ाई को बाधित करने का जघन्य अपराध परिजनों के द्वारा किया जाता है. जो काफी चिंतनीय है. हमसबों को नारी शिक्षा के महत्व को समाज के जन- जन तक पहुंचाना होगा.
बिना लड़कियों की शिक्षा के बेहतर समाज की परिकल्पना करना बेईमानी है. युवा समाजसेवी शालिनी सिंह तोमर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमसबों का यह कर्तव्य है कि अपने घर- परिवार की लड़कियों की हिम्मत बढ़ाएँ वो कोख से बच आयी है तो दहेज से भी बच ही जायेगी. बस जरूरत है तो उनके सपनों को पंख देने की. अपनी पेंटिंग से आमलोगों के मन में जगह बनानेवाली सुश्री आकृति झा ने इस मिशन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर विशेष चर्चा की.
इस मीटिंग में अरविन्द कुमार, सुदर्शन कुमार ठाकुर, प्रीतमकौशिक, विकाश वर्धन एवं कुमार आनंद पाठक सहित अन्य सभी ने मिशन से सम्बंधित अपने विचारों को रखा.
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