वे भूपेंद्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय, साहूगढ़-मधेपुरा के तत्वावधान में ‘हिंदी का बढ़ता दायरा महत्व और चुनौतियां’ विषयक वेबिनार में बोल रही थीं. उन्होंने कहा कि आज इंग्लिश न्यूज़ चैनल में भी जब गहन विषय पर विवेचन होता है, तो एंकर और जो प्रतिनिधि गण होते हैं, वे हिंदी में बोलने लगते हैं. क्योंकि उन्हें भी पता है कि हिंदी को सुनने, समझने वाले लोग ज्यादा हैं. इसलिए वे अपनी बात को संप्रेषित करने के लिए हिंदी का सहारा लेते हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर अंग्रेजीयत का लबादा है. इसके कारण लोग अशुद्ध अंग्रेजी बोलने वाले को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और शुद्ध हिंदी बोलने वाले को भी उतना ज्यादा महत्व देना नहीं चाहते हैं. हमें इस मानसिकता को छोड़ना होगा. उन्होंने कहा कि आज हिंदी के मूल स्वरूप को जीवित रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है. साथ ही हमें हिंदी की लिपि को भी जागृत रखना होगा. हम लोग हिंदी की बात को अंग्रेजी में टाइप कर देते हैं, इससे बचने की आवश्यकता है.
हम हिंदी की सेवा करना चाहते हैं, तो हिंदी को उसकी लिपी में लिखने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मातृभाषा का मतलब है कि घर में मां के द्वारा बोली जाने वाली भाषा. मातृभाषा एकीकरण की भाषा है, इसको भी जीवित रखना है. अपनी मातृभाषा भाषा के द्वारा संप्रेषण अधिक सहज होता है. उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति भी आदर एवं सम्मान का भाव जागना चाहिए. आज मैथिली सहित हमारी अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की लिपियां धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं. हमें विभिन्न लिपियों को बचाने की पहल करनी होगी.
मुख्य वक्ता डॉ. अभिषेक कुमार यादव, राजीव गाँधी विश्वविद्यालय, अरूणाचल प्रदेश ने उत्तर-पूर्व भारत में हिन्दी का विकास विषय पर अपने विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर पूर्वी भारत में हिंदी की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है. विशिष्ट वक्ता डॉ. हर्षबाला शर्मा, आई. पी. काॅलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली ने भारत के बाहर हिन्दी की स्थिति विषय पर अपने विचार व्यक्त कि. एउन्होंने कहा कि भारत के बाहर हिंदी का विकास प्रवासी भारतीयों के कारण हुआ.
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. के. एस. ओझा, वेनिनार संयोजक डॉ. शेफालिका शेखर, जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. पी. एन. पियूष, डॉ. नवीन कुमार सिंह, डॉ. सत्येन्द्र, नवीनचंद्र यादव, मुकेश कुमार, रवि कुमार, मीरा कुमारी, अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, डॉ. सरोज कुमार, अतिथि व्याख्याता, हिन्दी विभाग, अंंजली कुमारी, अतिथि व्याख्याता, हिन्दी विभाग आदि उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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