अगर देखा जाए. तो आमतौर पर जब हम बाजार से कोई समान की खरीददारी करते हैं तो अधिकतर प्लास्टिक से बने थेल़े का उपयोग करते हैं और फिर उसे अपने ही घर के आसपास फेक देते हैं, जो सड़- गल कर वातावरण को दूषित करते रहते और हमारा ध्यान तक पुनः उनपर नहीं जाता है! कहने को तो हम मनुष्य कहलाते हैं पर अपने ही बुद्धिहीन कार्य का मूल्यांकन उचित समय पर नहीं कर पाते हैं. इसपर गंभीर रूप से विचार करने की जरूरत है.
गौरतलब है कि आपको कचरों का ढेर व्यापक पैमाने पर बड़ा टिहला के रूप में आसानी से शहर में जगह- जगह देखने को मिल जाता है, जो शर्म की बात है. हमे विचार कर स्वच्छता की दिशा में काम करना होगा.आज बडे़ आसानी से हमें स्वच्छ हवा का मिलना भी मुश्किल हो जाता है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार समुद्र में 80 लाख टन कचरा जाता हैं, जिसे हम धरती का एयरकंडीशनर कहते हैं. इसमें कार्बन डाइऑक्साइड बढने से पानी गर्म होने के कारण अधिकतर मछलियाँ मर रही हैंं.जो कि व्यापक पैमाने पर वातावरण को हानि पहुंचाने का काम तेज रफ़्तार के साथ कर रही हैं. ऐसी स्थिति में हमें क्या? उम्मीद करनी चाहिए. सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे कि हम भविष्य में आने वाले और भी भयंकर समस्या के निदान हेतुु अभी से कार्य करने की ओर अग्रसर हो. स्वच्छता को लेकर मिशन भी चलाया जा रहा है पर इसे जमीनी स्तर पर लाने की जरूरत है.
(रिपोर्ट:- कौस्तुभा)
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