मधेपुरा: सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ एथलीट्स मिल्खा सिंह का कोरोना से संघर्ष करते हुए इकानवें वर्ष की उम्र में चंडीगढ़ में हुए निधन के बाद जिला मुख्यालय के धावकों ने स्टेडियम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर नम आंखों से आखिरी सलाम करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर चर्चित कोच शम्भु कुमार ने कहा कि मिल्खा सिंह भारत के धावकों की कड़ी में सबसे आगे थे हर दौर में वो धावकों के आदर्श रहेंगे. पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने उनकी प्रतिभा से कायल होकर उन्हें फ्लाइंग सिख का नाम दिया था.
उनकी यह तमन्ना थी कि उनके जीवन काल में कोई भारतीय एथलीट मेडल जीते लेकिन यह अरमान अधूरा रहा उनके इस सपने को पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. शिव राजेश्वरी युवा सृजन क्लब कोसी प्रमंडल के महासचिव हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि जिंदगी के नौ दशक से ज्यादा का सफर तय करने वाले मिल्खा सिंह हर दौर में भारतीयों के दिलों में जिंदा रहेंगे और धावकों को संघर्षों के बीच सफलता का इतिहास लिखने को प्रेरित करेंगे. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में समाज व राष्ट्र ने बड़ी संख्या में आम जनों के साथ नामचीन हस्तियों को भी खोया है जिसकी भरपाई सम्भव नहीं.
राठौर ने कहा कि इनके अधूरे सपने को मंजिल तक ले जाना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है. बंटवारे के बाद भारत आए मिल्खा ने विभिन्न स्तरों पर भारत के लिए अनेकानेक मेडल अपने नाम किया और देश का मान बढ़ाया उनके जिंदगी का एकमात्र लक्ष्य शायद सिर्फ सफलता और सफलता ही था जिसको वो ताउम्र जिए. इस अवसर पर जयराज, जसीम, अमित, मुस्कान, मन्नू, सनोज, सोनू, अजय, संजीव, चन्दन, अजीत, सुमन सहित बड़ी संख्या में धावकों ने नम आंखों से मिल्खा सिंह को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें धावकों की कड़ी में भारत का सिरमौर बताया और कहा कि उनके गुरुमंत्र हमेशा मंजिल तक जाने का रास्ता दिखाएंगे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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