मधेपुरा: बीएनएमयू में शिक्षा शास्त्र के अधिग्रहण को ले एआईएसएफ ने बुधवार को बीएनएमयू कुलपति को मांगपत्र सौंप शिक्षा शास्त्र विभाग के अधिग्रहण की मांग उठाई. पन्द्रह मिनट की मुलाकात में संगठन ने कुलपति को बताया कि विगत लंबे समय से शिक्षा शास्त्र विभाग में समय पर वेतन,सम्मानजनक वेतन, कोर्ट के निर्णय का पालन, फीस बढ़ोतरी का विरोध चल रहा है जिसको लेकर विश्वविद्यालय को कई स्तरों पर बड़ी मशक्कत करनी पड़ती रहती है. ऐसे में अगर शिक्षा शास्त्र विभाग के अधिग्रहण की ओर बीएनएमयू पहल करे तो विभाग की फिंजा ही बदल जाएगी.
छात्रों को एक, डेढ़ लाख की जगह जहां अत्यन्त कम दस पन्द्रह हजार में बी एड, एमएड का सुअवसर मिलेगा वहीं शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन भी. जो नैक से मान्यता,व शैक्षणिक माहौल बनाने में खासा कारगर होगाा. लिखे पत्र में राठौर ने कहा कि बिहार में सबसे पहले शिक्षा शास्त्र विभाग के अधिग्रहण की पहल पटना विश्वविद्यालय में हुई और उसका श्रेय प्रो बलराम तिवारी को जाता है जो मूल रूप से मधेपुरा जिला से ही आते हैंं. शिक्षा शास्त्र विभाग के सरकारीकरण होते ही इस क्षेत्र की छात्राओं व एससी, एसटी के छात्रों को निशुल्क डिग्री प्राप्त करने का मौका मिलेगा जो अपने आप में बड़ी बात होगी. राठौर ने बताया कि डॉ बलराम तिवारी अपना अनुभव का लाभ देने को तैयार भी हैं.
एआईएसएफ की मांग कुलपति ने विश्वविद्यालय हित में बताते हुए त्वरित संज्ञान लेते हुए इसके लिए एक वरीय पदाधिकारी को अधिकृत किया. एआईवाईएफ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शम्भु क्रांति, एआईएसएफ राज्य परिषद् सदस्य सौरव कुमार ने कहा कि अगर बीएनएमयू अधिग्रहण को ले ईमानदार पहल करता है तो यह इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा. सको अगर निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर सरकार से अनुमति मिल जाती है तो कम समय में इसे पूरा किया जा सकता है. विश्वविद्यालय को संगठन इस सम्बन्ध में हर सम्भव मदद करेगा. इस सम्बन्ध में नीतिगत बिंदुओं पर सहयोग के लिए डॉ बलराम तिवारी भी सकारात्मक हैं. संगठन ने उम्मीद जताई कि अगर समय पर सबकुछ ठीक ढंग से हुआ तो विश्वविद्यालय को बड़ी सौगात मिल सकती है.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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