आरक्षित सीट न मिलने पर रेलवे दोषी करार, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

Post Top Ad

2 जून 2026

आरक्षित सीट न मिलने पर रेलवे दोषी करार, उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना

भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय रेलवे को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी पाया है. आरक्षित टिकट होने के बावजूद यात्रियों को सीट उपलब्ध न करा पाने के मामले में आयोग ने रेलवे को टिकट की पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया है. 

क्या है पूरा मामला

कोईलवर प्रखंड के कायमनगर निवासी रविशंकर पांडेय अपने तीन साथियों के साथ विंध्याचल से आरा लौट रहे थे. उन्होंने आईआरसीटीसी के जरिए ट्रेन संख्या 13202 एलटीटी-पटना एक्सप्रेस के बी-4 कोच में सीट नंबर 58, 62, 63 और 68 आरक्षित कराई थी. इसके लिए कुल 1,876.80 रुपये का भुगतान किया गया था. 

ट्रेन में मिली भीड़, टीटीई-आरपीएफ ने भी नहीं की मदद

भुक्तभोगी रविशंकर पांडेय के मुताबिक, ट्रेन में अत्यधिक भीड़ थी और उनकी आरक्षित सीटों पर अन्य यात्रियों ने कब्जा कर रखा था. सीट खाली करने का आग्रह करने पर यात्रियों ने दुर्व्यवहार किया. शिकायत करने पर टिकट परीक्षक (टीटीई) और रेलवे पुलिस (आरपीएफ) से भी कोई मदद नहीं मिली. यात्रियों ने रेलवे सेवा और रेल मंत्रालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. नतीजतन चारों यात्रियों को पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ी. 

रेलवे की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान रेलवे ने दलील दी कि शिकायत पर कार्रवाई की गई थी और यह कानून-व्यवस्था का मामला है. हालांकि, आयोग ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद रेलवे की इस दलील को खारिज कर दिया. आयोग ने स्पष्ट कहा कि आरक्षित टिकट होने के बावजूद सीट उपलब्ध न कराना यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन और रेलवे की सेवा में गंभीर कमी है 

चार साल बाद आया फैसला, रेलवे पर जुर्माना

लगभग चार वर्षों की सुनवाई के बाद भोजपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादियों के पक्ष में फैसला सुनाया. आयोग ने उत्तर मध्य रेलवे और रेल मंत्रालय को निर्देश दिए. 1,876.80 रुपये की टिकट राशि 8% वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाए. मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक उत्पीड़न के लिए 20,000 रुपये दिए जाएं. मुकदमा खर्च के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने होंगे. आयोग ने यह राशि 60 दिनों के अंदर देने का आदेश दिया है. 

फैसले के मायने

यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में अहम माना जा रहा है. आयोग के निर्णय से साफ संदेश गया है कि आरक्षित टिकट जारी करने के बाद यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है. यह मामला अन्य यात्रियों के लिए राहत और रेलवे की जवाबदेही तय करने का उदाहरण बनेगा.

(रिपोर्ट:- सुनीत साना)

पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....

Post Bottom Ad

Pages