शहर के एक कॉलेज
का उड़ा चदरा शहर के विमेंस कॉलेज
का टीना वाला छत पुरी तरह से उड़ गया और घर के अन्दर चल रहे प्लास्टर कार्य में
भारी बरबादी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में यह बरबादी और भी अधिक हुई है। गरीबों के
झोपड़े अब फुस-खर की कीमत अधिक होने के कारण कम हो गये हैं। आंधी के बाद तेज बारिश
और फिर शाम हो जाने के कारण बरबादी का अंदाजा अभी तक नहीं लग सका है। गेहूं की फसल को
हो रही सर्वाधिक क्षति किसानों का कहना
है कि गेहूं की फसल पक कर तैयार है। कटाई के लिए मजदूरों की प्रतिक्षा में किसानों
के चेहरे पर मायुसी थी। वहीं अब बेमौसम बारिश ने उनकी चिन्ता और बढ़ा दी है। पानी
में फसल के भींग जाने के कारण उसकी कटाई में एक सप्ताह से अधिक का समय लगना लाजमी
है। समय पर कटाई नहीं होने से फसल का फल भी टूट कर मिट्टी में बिखर सकता है। इसके
अलावा हवा के साथ आई बारिश से गेहूं की फसल जमीन पर गिर गया है जिसे काटने में
परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं खेत से काट कर थ्रेसिंग के लिए
तैयार गेहूं के बोझ में पानी घुस जाने के कारण उसकी तैयारी भी नहीं हो पाती है।
अधिक समय तक भींगे रह जाने के कारण गेहूं के दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है
जिससे किसान उसे कौड़ी के भाव में बेचने को विवश हो जाते हैं। हवा में गिरे आम
काटिकौला तेज हवा के साथ
हुई बारिश ने आम की फसल को प्रभावित किया है। तेज हवा के झोंके से टिकोले जमीन पर
गिर गए जिससे आम का फसल नष्ट हो गया है। इसके साथ साथ केला, ईख, कद्दु जैसे फसल
को भी बेमौसम बारिश से क्षति हुई है। क्या कहते हैं
पदाधिकारी जिला कृषि
पदाधिकारी राम किशोर राय का कहना है कि बेमौसम बारिश से किसानों को क्षति हुई है।
गेहूं की तैयारी पर तो असर पड़ा ही है साथ साथ मूंग की खेत में पानी जमा हो जाने के
कारण उसका अंकुरण प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों को कम पैदावार मिलेगा।
शहर के एक कॉलेज
का उड़ा चदरा शहर के विमेंस कॉलेज
का टीना वाला छत पुरी तरह से उड़ गया और घर के अन्दर चल रहे प्लास्टर कार्य में
भारी बरबादी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में यह बरबादी और भी अधिक हुई है। गरीबों के
झोपड़े अब फुस-खर की कीमत अधिक होने के कारण कम हो गये हैं। आंधी के बाद तेज बारिश
और फिर शाम हो जाने के कारण बरबादी का अंदाजा अभी तक नहीं लग सका है। गेहूं की फसल को
हो रही सर्वाधिक क्षति किसानों का कहना
है कि गेहूं की फसल पक कर तैयार है। कटाई के लिए मजदूरों की प्रतिक्षा में किसानों
के चेहरे पर मायुसी थी। वहीं अब बेमौसम बारिश ने उनकी चिन्ता और बढ़ा दी है। पानी
में फसल के भींग जाने के कारण उसकी कटाई में एक सप्ताह से अधिक का समय लगना लाजमी
है। समय पर कटाई नहीं होने से फसल का फल भी टूट कर मिट्टी में बिखर सकता है। इसके
अलावा हवा के साथ आई बारिश से गेहूं की फसल जमीन पर गिर गया है जिसे काटने में
परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं खेत से काट कर थ्रेसिंग के लिए
तैयार गेहूं के बोझ में पानी घुस जाने के कारण उसकी तैयारी भी नहीं हो पाती है।
अधिक समय तक भींगे रह जाने के कारण गेहूं के दाने की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है
जिससे किसान उसे कौड़ी के भाव में बेचने को विवश हो जाते हैं। हवा में गिरे आम
काटिकौला तेज हवा के साथ
हुई बारिश ने आम की फसल को प्रभावित किया है। तेज हवा के झोंके से टिकोले जमीन पर
गिर गए जिससे आम का फसल नष्ट हो गया है। इसके साथ साथ केला, ईख, कद्दु जैसे फसल
को भी बेमौसम बारिश से क्षति हुई है। क्या कहते हैं
पदाधिकारी जिला कृषि
पदाधिकारी राम किशोर राय का कहना है कि बेमौसम बारिश से किसानों को क्षति हुई है।
गेहूं की तैयारी पर तो असर पड़ा ही है साथ साथ मूंग की खेत में पानी जमा हो जाने के
कारण उसका अंकुरण प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों को कम पैदावार मिलेगा।








