तूफान के कारण जहां मधेपुरा में सात लोगों की मौत हुई। वहीं भूकंप से नौ लोग काल के गाल में समा चुके हैं। जबकि इस दौरान करीब तीन दर्जन लोग जख्मी हुए हैं तथा 20 हजार से अधिक लोगों के आवास क्षतिग्रस्त हुए हैं। इतना सबकुछ होने के बाद भी लगातार हो रहे भूकंप के झटकों ने लोगों की नींद हराम कर दी है। दरअसल लोग रातभर जगकर गुजार रहे हैं। स्थिति यह है कि थोड़ी-सी आहट पर अफरा-तफरी मच जाती है। लोग घरों से बाहर निकल जाते हैं। कई घरों में तो चार दिनों से चूल्हा तक नहीं जल पाया है। पड़ोसी से जो कुछ मिल जाता है उसी से काम चला लेते हैं। सबसे खराब स्थिति मुरलीगंज व बिहारीगंजप्रखंड की है। जहां तूफान ने जमकर तबाही मचाई थी। आंखों में घूम रही काली रात जोरगामा मुसहरी टोला निवासी जोगीन्द्र ऋषिदेव एवं पोखराम मोरकाही निवासी मृतका वृन्दा देवी के परिजनों का कहना है कि आंखों के सामने अब भी वहीं काली रात घूम रही है। उस काली रात ने सबकुछ छीन लिया। घर गया, परिवार गया और अब जीने की इच्छा भी समाप्त हो गई है। बस दर्द ही दर्द है। किसकी कलाई पर राखी बांधेगी दुलारी तूफान में मुरलीगंज प्रखंड के डुमरिया निवासी डब्लू कुमार को मुखाग्नि देने वाली 12 वर्षीय बहन दुलारी कहती है कि अब वह किसे राखी बांधेगी। उसकी तो दुनिया ही उजड़ गयी। बहन भाई की रक्षा के लिए कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। लेकिन उसने तो बाई को आग के हवाले कर दिया। इतना कहते-कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगता है। वहीं रमणी गांव की बिन्दा देवी की मौत हुई थी। उसकी बेटी सुलेखा देवी कहती है कि क्या पता था कि तूफान उसका साया ही छीन लेगा। आंखें अब भी मां का इंतजार करती है। यह विश्वास नहीं होता कि मां अब लौटकर नहीं आएगी। इसी प्रकार का दर्द डुमरिया के बालेश्वर यादव को भी है जिसने पोती रानी को दिल पर पत्थर रखकर मुखाग्नि दी है। तूफान पीड़ित को राहत दी जा रही है। सभी प्रखंडों में राहत कार्य चल रहा है।
गोपाल मीणा
जिलाधिकारी, मधेपुरा









