06/05/15 पर्चाधारियों को जमीन पर दखल नहीं मिलने को लेकर तीन दिन से जारी अनशन बुधवार को उग्र हो गया। आंदोलनकारी पारंपरिक हथियारों से लैसे थे और महिलाओं ने थाम में झाड़ू थाम रखी थी। पर्चाधारियों का समर्थन भाकपा कार्यकर्ता भी कर रहे थे।
बुधवार को भाकपा कार्यकर्ताओं ने अनुमंडल कार्यालय का घेराव कर रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। करीब तीन घटे तक अनुमंडल कार्यालय प्रदर्शनकारियों के कब्जे में रहा। इस दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर नहीं निकलने दिया। साथ ही सभी काम को ठप करा दिया गया। स्थिति को देखते हुए कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गयी थी। बाद में एसडीपीओ मु. रहमत अली किसी प्रकार लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि आलमनगर के गनौल और मुरौत गाव के पर्चाधारियों को अब तक जमीन पर दखल नहीं मिला है। जबकि दखल दिलाने का आदेश कोर्ट से प्राप्त है। आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है? अनशनकारियों की तीन दिन बाद भी सुध नहीं ली गयी है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि भूमिहीनों को जमीन देने, पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने की घोषणाएं हवा हवाई साबित होकर रह गई है। जिन गरीबों को पर्चा मिला लेकिन दखल दिलाने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा भूमि सुधार कानून बदलना चाहिए ताकि गरीबों को लाभ मिल सके। वहीं तूफान पीड़ितों के मुआवजा सूची में भी गड़बड़ी है। जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। पार्टी के वरीय नेता प्रो. देवनारायण देव ने कहा कि दलित और महादलित जिल्लत भरी जिंदगी जी रहे हैं। भाकपा नेता रामदेव सिंह उमेश यादव, बीरेंद्र नारायण सिंह, मु. चाद, दिनेश्वर प्रसाद सिंह, मोती सिंह, रमण कुमार पिंटू ने कहा कि गरीबी उन्मूलन और विकास योजनाओं में लूट मची हुई है। बाद में 11 सूत्री माग पदाधिकारी को सौंपा। जहा पदाधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। मौके पर जगत नारायण शर्मा, अंबिका मंडल, फलेश्वर मंडल, पवन सिंह, रतन कुमार राय आदि उपस्थित थे।
बुधवार को भाकपा कार्यकर्ताओं ने अनुमंडल कार्यालय का घेराव कर रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। करीब तीन घटे तक अनुमंडल कार्यालय प्रदर्शनकारियों के कब्जे में रहा। इस दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर नहीं निकलने दिया। साथ ही सभी काम को ठप करा दिया गया। स्थिति को देखते हुए कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गयी थी। बाद में एसडीपीओ मु. रहमत अली किसी प्रकार लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि आलमनगर के गनौल और मुरौत गाव के पर्चाधारियों को अब तक जमीन पर दखल नहीं मिला है। जबकि दखल दिलाने का आदेश कोर्ट से प्राप्त है। आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है? अनशनकारियों की तीन दिन बाद भी सुध नहीं ली गयी है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि भूमिहीनों को जमीन देने, पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने की घोषणाएं हवा हवाई साबित होकर रह गई है। जिन गरीबों को पर्चा मिला लेकिन दखल दिलाने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा भूमि सुधार कानून बदलना चाहिए ताकि गरीबों को लाभ मिल सके। वहीं तूफान पीड़ितों के मुआवजा सूची में भी गड़बड़ी है। जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। पार्टी के वरीय नेता प्रो. देवनारायण देव ने कहा कि दलित और महादलित जिल्लत भरी जिंदगी जी रहे हैं। भाकपा नेता रामदेव सिंह उमेश यादव, बीरेंद्र नारायण सिंह, मु. चाद, दिनेश्वर प्रसाद सिंह, मोती सिंह, रमण कुमार पिंटू ने कहा कि गरीबी उन्मूलन और विकास योजनाओं में लूट मची हुई है। बाद में 11 सूत्री माग पदाधिकारी को सौंपा। जहा पदाधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। मौके पर जगत नारायण शर्मा, अंबिका मंडल, फलेश्वर मंडल, पवन सिंह, रतन कुमार राय आदि उपस्थित थे।









