24/8/2015 सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को सिंघेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. इस दिन भक्तिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजयी मिलती है. जीवन में आनेवाली संकट और बाधाओं से भगवान शिव रक्षा करते हैं. सावन के अंतिम सोमवारी के मौके पर देवाधिदेव महादेव की नगरी सिंघेश्वर में हजारों श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. अहले सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सुबह से ही हर हर महादेव का जयघोष से सिंघेश्वर गूंजता रहा. कई जगह श्रद्धालुओं और कांवरियों की सेवा के लिए स्टॉल लगाया गया. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर का पट सबेरे 3 बजे हीं खोल दिया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशाशन भी पूरी मुस्तैद थी. देर शाम तक बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु आते रहे. इस दौरान बिहार के अन्य जिलों और नेपाल के तराई क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिंघेश्वर मंदिर पहुंचे. भोलेनाथ की जलाभिषेक करने के लिए सुबह से हीं शिवगंगा से मंदिर के गर्भगृह तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही. इस दौरान सिंघेश्वर में श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से भी जूझना पड़ा.
24/8/2015 सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को सिंघेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. इस दिन भक्तिपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजयी मिलती है. जीवन में आनेवाली संकट और बाधाओं से भगवान शिव रक्षा करते हैं. सावन के अंतिम सोमवारी के मौके पर देवाधिदेव महादेव की नगरी सिंघेश्वर में हजारों श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया. अहले सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सुबह से ही हर हर महादेव का जयघोष से सिंघेश्वर गूंजता रहा. कई जगह श्रद्धालुओं और कांवरियों की सेवा के लिए स्टॉल लगाया गया. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर का पट सबेरे 3 बजे हीं खोल दिया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशाशन भी पूरी मुस्तैद थी. देर शाम तक बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु आते रहे. इस दौरान बिहार के अन्य जिलों और नेपाल के तराई क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिंघेश्वर मंदिर पहुंचे. भोलेनाथ की जलाभिषेक करने के लिए सुबह से हीं शिवगंगा से मंदिर के गर्भगृह तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही. इस दौरान सिंघेश्वर में श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से भी जूझना पड़ा.








