चचरी पुल पर हिचकोले खा रही जिंदगी - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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30 अक्टूबर 2015

चचरी पुल पर हिचकोले खा रही जिंदगी

बिहारीगंज विधान सभा क्षेत्र के गंगापुर-वृंदावन गांव के बीच नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है. इससे ग्रामीणों के आवागमन की गंभीर समस्या बनी हुई हैं. नदी में पानी का स्तर कम रहने पर लोग नदी के बीचों-बीच चचरी पुल बना कर एक गांव से दूसरे गांव का आवागमन करते हैं. लेकिन, बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से नाव ही आवागमन का एक मात्र साधन होता है. इस नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया. क्षेत्र की हजारों महिलाएं व पुरुष इसी आस में जन प्रतिनिधियों को वोट करते हैं कि कोई तो आवागमन की समस्या से निजात दिलायेगा. उक्त समस्या को लेकर गंगापुर, रमनी, बृंदावन, हनुमानपट्टी व भलनी सहित दर्जनों के गांव के लोग कई बार आक्रोशित हो कर जाम, धरना आदि भी दिया. लेकिन, जनप्रतिनिधियों व प्रशासन के उदासीन रवैये को देख निराश हो जाते हैं. जन जोखिम में डाल कर करते हैं नदी पार यहां के लोगों के लिए जान जोखिम में डाल कर हमेशा नाव के सहारे मोटर साइकिल, साइकिल, बकरी व रोजमर्रा के समान इस पार से उस पार ले जाते हैं. जिस कारण हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. वहीं नदी में जब पानी कम होता है, तो बांस की चचरी पुल के सहारे यहां के लोगों का आवागमन होता है. कई बार चचरी पुल से साइकिल सवार नदी में गिर भी चुके हैं. विशेष कर रात के समय में आवागमन करना वहां के ग्रामीणों की परेशानी का सबब बना रहता है. सामाजिक कार्यक्रम के दौरान बाहर से आने वाले अतिथियों को घोर परेशानी का सामना करना पड़ता है. नदी के इस पार ही गाड़ी खड़ी कर गांव में प्रवेश कर रहे हैं. कहते हैं ग्रामीणगंगापुर के ग्रामीण मिथिलेश यादव, पंकज यादव, मुन्ना यादव, विद्यानन्द यादव, मोमुस्लिम मियां, शम्भु साह, आशोक साह, दयानन्द यादव, वृंदावन के रंजित कुमार सुमन, विष्णुदेव मेहता, नित्यानन्द यादव, पुरण दास, विरेन्द्र ऋषिदेव, गजेन्द्र यादव, महेन्द्र मलिक, मो़दुखा मियां का कहना है कि इस नदी के बीच चचरी पुल टूट चुका है. किसी तरह ग्रामीण आवागमन करते हैं. वर्तमान की स्थिति यह है चचरी पुल टूट जाने के कारण नाव से आवागमन होता है. वहीं ग्रामीणों ने कहा कि दोनों गांव के बीच यह नदी पर पुल नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बच्चों के स्कूल जाने और आने के समय हमलोगों को हमेशा डर बना रहता है. हजारों परिवार के लिए आवागमन की गंभीर समस्या बनी हुई है. चार पहिया वाहनों को लंबी दूरी करनी पड़ती है तयनदी पर पुल नही रहने से चार पहिया वाहन वाले को गांव तक आने के लिए लंबी दूरी तय करना पड़ता है. नदी मे कम पानी रहने पर प्रत्येक वर्ष यहां के ग्रामीण आपस में चंदा कर चचरी बनाकर आवागमन की सुविधा बहाल करते है. जब नदी के पानी के स्तर में वृद्धि होती है तो नाव के सहारे आवागमन किया जाता है. सड़क है जर्जर ग्रामीणों ने कहा कि नदी किनारे दोनों और से पक्की व कच्ची सड़क बनी हुई है. इसकी स्थिति ठीक नहीं है. सड़क के कारण ही ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बावजूद न तो नदी पर पुल का निर्माण किया गया और नहीं सड़क की स्थिति में सुधार हुआ. चुनाव के समय बड़े बडे नेता वादे करते है सपने दिखाते है. जमीनी स्तर पर विकास नहीं देख, उसे चुनावी मुद्दा बना कर राजनीति करने मे मशगुल हो जाते है. चुनाव जीतने के बाद जनता से किये वादे और सपने को भुल जाते है. जनता को फटेहाल पर छोड़ देते है.

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