मधेपुरा: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हाई स्कूल शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) रद्द करने के बिहार बोर्ड के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए शनिवार को काला रूप में दिवस मनाया. संगठन के प्रदेश सह मंत्री अभिषेक यादव एवं अभाविप केे विश्वविद्यालय प्रमुख सह बीएनएमयू के सीनेट सदस्य रंजन यादव ने कहा कि बिहार बोर्ड का यह निर्णय न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि आत्मघाती भी है.
इसको लेकर संगठन बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व बिहार बोर्ड अध्यक्ष को पत्र लिख पुनर्विचार का आग्रह किया है. उन्होंने कहा एसटीईटी परीक्षा के पूरे घटनाक्रम के अध्ययन हेतु अभाविप ने एक आंतरिक अध्ययन दल गठित की थी. अध्ययन दल की रिपोर्ट बीएसईबी के रिजल्ट प्रकाशित होने के समय अचानक परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय से खुद उसकी कार्यशैली पर ही प्रश्नचिन्ह लगा रही है.
जिला संयोजक शशि कुमार यादव एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अमोद आनंद एवं नीतीश कुमार ने कहा की एसटीईटी की परीक्षा रद्द करने का निर्णय गलत था. उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को जब एसटीईटी परीक्षा आयोजित की गई थी तब बोर्ड की ओर से केंद्रों पर त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई थी. परीक्षा के दौरान संपूर्ण समय काल की वीडियोग्राफी भी करायी गई थी.
जिन सेंटर्स पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा बहिष्कार किए थे या फिर देर केंद्र पर पहुंचने की वजह से गेट लॉक कर दिए गए थे. उन केंद्रों पर बोर्ड ने फरवरी में पुनः परीक्षा भी ली थी. लेकिन फरवरी की परीक्षा के बाद कभी भी किसी न्यूज़ पेपर, छात्र संगठन या परीक्षार्थी समूह ने न तो परीक्षा रद्द करने की मांग की और न बहिष्कार किया.
फिर बोर्ड ने आंसर शीट जारी कर आपत्ति की तिथियां घोषित की. बोर्ड अध्यक्ष की ओर से भी 15 मई तक हर हाल में रिजल्ट घोषित करने की बात कही जाती रही. फिर युं अचानक से 16 मई को 4 सदस्य टीम के बारे में जानकारी देते हुए परीक्षा को रद्द करने की बात कही गई. जबकि के बाद बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि न तो कहीं परीक्षा का पर्चा लीक हुआ है और न परीक्षा में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ है.
तो फिर अचानक ऐसी क्या मजबूरी आ गई जिसकी वजह से बोर्ड को पुरी एसटीईटी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि सभी संबंधितों से परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है. यदि ऐसा नहीं होता है तो संगठन को आंदोलन करने को बाध्य होंगा. जिसकी सारी जवाबदेही विभाग व बोर्ड की होगी.
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
इसको लेकर संगठन बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व बिहार बोर्ड अध्यक्ष को पत्र लिख पुनर्विचार का आग्रह किया है. उन्होंने कहा एसटीईटी परीक्षा के पूरे घटनाक्रम के अध्ययन हेतु अभाविप ने एक आंतरिक अध्ययन दल गठित की थी. अध्ययन दल की रिपोर्ट बीएसईबी के रिजल्ट प्रकाशित होने के समय अचानक परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय से खुद उसकी कार्यशैली पर ही प्रश्नचिन्ह लगा रही है.
जिला संयोजक शशि कुमार यादव एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अमोद आनंद एवं नीतीश कुमार ने कहा की एसटीईटी की परीक्षा रद्द करने का निर्णय गलत था. उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को जब एसटीईटी परीक्षा आयोजित की गई थी तब बोर्ड की ओर से केंद्रों पर त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई थी. परीक्षा के दौरान संपूर्ण समय काल की वीडियोग्राफी भी करायी गई थी.
जिन सेंटर्स पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा बहिष्कार किए थे या फिर देर केंद्र पर पहुंचने की वजह से गेट लॉक कर दिए गए थे. उन केंद्रों पर बोर्ड ने फरवरी में पुनः परीक्षा भी ली थी. लेकिन फरवरी की परीक्षा के बाद कभी भी किसी न्यूज़ पेपर, छात्र संगठन या परीक्षार्थी समूह ने न तो परीक्षा रद्द करने की मांग की और न बहिष्कार किया.
फिर बोर्ड ने आंसर शीट जारी कर आपत्ति की तिथियां घोषित की. बोर्ड अध्यक्ष की ओर से भी 15 मई तक हर हाल में रिजल्ट घोषित करने की बात कही जाती रही. फिर युं अचानक से 16 मई को 4 सदस्य टीम के बारे में जानकारी देते हुए परीक्षा को रद्द करने की बात कही गई. जबकि के बाद बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि न तो कहीं परीक्षा का पर्चा लीक हुआ है और न परीक्षा में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ है.
तो फिर अचानक ऐसी क्या मजबूरी आ गई जिसकी वजह से बोर्ड को पुरी एसटीईटी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि सभी संबंधितों से परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है. यदि ऐसा नहीं होता है तो संगठन को आंदोलन करने को बाध्य होंगा. जिसकी सारी जवाबदेही विभाग व बोर्ड की होगी.
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