इस तरीके से प्रवासी लोगों को सुरक्षित वापस ला सकती है सरकार..... - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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6 मई 2020

इस तरीके से प्रवासी लोगों को सुरक्षित वापस ला सकती है सरकार.....


मधेपुरा : सबसे पहले तो प्रवासी मजदूरों की आवाजाही कोई नई घटना तो नहीं है। दरअसल अचानक आई कोरोना संक्रमण से महामारी के कारण आज समाज और शासन केंद्र से राज्य तक लॉकडाउन से उत्पन्न समस्या खास करके प्रवासी श्रमिक, श्रमिक न केवल  अपने लिए कमा रहे होते, बल्कि अर्थव्यवस्था को सदैव गतिमान रखने वाले और अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। इनकी बचत के पैसे से परिवार और गांव आर्थिक रूप से गतिशील रह पाते हैं। 

वर्तमान दौर में प्रवासी श्रमिक की दयनीय स्थिति हो गई और वह अन्य राज्यों में फंसे हुए कई दिनों से भूखे कुछ पैदल यात्रा कर अपने घर वापस आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें इतने लंबे समय तक बाजार उद्योग बंद होने जिससे उनको भविष्य में काम ना लगने जैसे आशंका पैदा हो गई। एक तरफ उनकी घर परिवार की चिंता होना खुद वापस घर आना स्वाभाविक है। इतना ही नही गांव से लेकर शहर तक अफरातफरी मचे हुए न उनको स्वास्थ्य सबंधी सही जानकारी मिल रही है। ऐसे हालात में श्रमिकों की भविष्य खतरे से कम नहीं, ऐसा न हो की अधिक समय तक संकट का सामना करने के कारण उनकी परिवार बच्चे कुपोषित के शिकार और बेकारी, भुखमरी, यौन हिंसा जैसे तनाव उतपन्न न हो। अब सरकार को चाहिए कि सभी प्रवासी श्रमिक को वापस अपने घर लाने और उनकी स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर हर संभव प्रयास करें।

इस संदर्भ में बीएनएमयू की शोध छात्रा नैनिका ने भी अपनी सुझाव दी है।  इस प्रकार उन्होंने बोली कि बिहार प्रवासी मजदूर जो अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं सरकार अगर उस राज्य सरकार से बात कर उन्हें ही सहायता राशि भेज देती तो लोगों के हाथ तक सहायता राशि पहुंच जाएगी। जिससे प्रवासी मजदूर वापस घर आ सकते हैं और कोरोना संक्रमण जांच कर ही वापस घर आने दें। आपके अंतिम सुझाव तर्कसंगत और स्वास्थ्य पहलू पर ध्यान देते हुए सही है। लेकिन उनकी पहली सुझाव जो कि सरकार उन राज्यों से बात कर उन्हें ही सहायता राशि दे देनी चाहिए और प्रवासी मजदूर के हाथों राशि आ जायेगी। प्रवासी वापस घर आ सकते हैं। यह बिल्कुल तर्कहीन और इसका उपयोग कम तथा दुरुपयोग ज्यादा सामने आएगा।  

क्योंकि ऐसे हालात में जहां सभी तरह के आवागमन बाजार बंद होने से किसी को सिर्फ आर्थिक सहायता देना अनुचित वो भी किसी अन्य राज्य सरकार प्रशासन को देना उचित नहीं है। क्योंकि लोगों की सही संख्या की जानकारी नहीं है। ऐसे संक्रमण काल में आर्थिक सहायता तथा स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा सभी को ध्यान में रखकर सहायता करने से ही कल्याण हो सकती है। सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन के निर्देशों को लोगों को कानूनन और व्यवहारिक तौर पर पालन करना  दायित्व है। ऐसे हालात में सिर्फ आर्थिक सहायता देने से उनकी आने जाने की बात कैसे ? जबकि सारे आवागमन बंद पड़े हैं। ऐसी परिस्थिति में सरकार को किसी अन्य राज्य सरकार को सहायता ना देकर खुद सहायता राशि के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी (कोरोना संक्रमण) को ध्यान में रखते हुए ताकि उनकी चेन प्रक्रिया को बढ़ावा ना मिले। ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए, जिसमें प्रवासी मजदूर अपने घर वापस आ सके साथ ही वहां के समाज पर संक्रमण का प्रभाव ना पड़े।

अब इस परिस्थिति में सरकार के लिए दो समस्याएँ हैं, जैसे पहले लोगों की जान बचाए या पहले अर्थ-व्यवस्था के लिए सोचे। व्यवहारिक तौर पर कहा जाए तो जान के साथ-साथ अर्थव्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था जीवन से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को फिलहाल चाहिए वह अपने तथा प्रशासनिक व्यवस्था से ही अन्य राज्य में फंसे प्रवासी श्रमिक को वापस अपने घर लाने हेतु स्पेशल ट्रेन, अन्तर्राजीय बस सेवा द्वारा जो भी सुविधा हो बिहार सरकार राज्य की राजधानी को (केंद्र) स्थान बना कर सभी राज्यों से प्रवासियों श्रमिक को लाएं, फिर वहां जांच प्रक्रिया कर जो पॉजिटिव पाए जाएंगे। उन्हें वहीं पर बनाए गए आपदा राहत केंद्र में कुछ दिन रखें। जो नेगेटिव है, उन्हें वह सभी जिला परिवहन विभाग को निर्देश दें सरकारी या प्राइवेट बस से पुनः अपने जिले भेज दे यह ग्रीन जोन, ऑरेंज जॉन, रेड जोन सभी के लिए यही प्रक्रिया अपनाये। साथ ही सभी जिला परिवहन विभाग को निर्देश दे की वे शहर में पहुंचे प्रवासी को ग्रामीण क्षेत्र तक जाने छोटे ऑटो सवारी को कुछ सुरक्षित हिदायत देकर उन्हें आवाजाही के लिए छूट दे, ताकि प्रवासी सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। यही प्रयास सरकार के लिए आर्थिक व सामाजिक तौर पर जो दीर्घकालीन सकारात्मक और बेहतर होगा। जिससे पुनः उद्योग धंधे साथ ही सुदृढ़ एवं अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।

लेखक - अमरेश कुमार अमर 
शोध छात्र अर्थशास्त्र विभाग बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा।

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