मधेपुरा: क्रांतिवीर शिवनंदन प्रसाद मंडल ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के दौरान शिक्षक की नौकरी से त्याग पत्र दे दिया और वकालत पेशे को तिलांजलि दे दी. यह उनकी ईमानदारी एवं निर्भीकता को दर्शाता है. इसके मूल में उनका आत्मबल था.
यह बात बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक एवं साहित्यकार डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने कही. वे सोमवार को यू-टयूब चैनल बीएनएमयू संवाद पर शिवनंदन प्रसाद मंडल : साधना एवं संघर्ष विषय क व्याख्यान की दसवीं एवं अंतिम कड़ी में बोल रहे थे. उन्होंनेे कहा कि शिवनंदन प्रसाद मंडल का आत्मबल आकाश से भी ऊंचा था.
वे अंग्रेज पदाधिकारियों को ईट के बदले पत्थर जैसा जवाब देते थे. जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि संवाद व्याख्यानमाला के आगे मंगलवार को डा. इंदू पांडेय खंडूरी, उत्तराखंड भारतीय दर्शन में मानसिक समस्याओं का समाधान विषय पर व्याख्यान देंगी.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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