हम चराचर जगत की एकता में विश्वास करते हैं: कुलपति - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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14 अगस्त 2020

हम चराचर जगत की एकता में विश्वास करते हैं: कुलपति

मधेपुरा: भारतीय सभ्यता-संस्कृति एवं दर्शन में समग्र जीवन एवं संपूर्ण विश्व की चिंता है. हमारे ॠषि-मुनियों ने न केवल मनुष्य, बल्कि समस्त जीव-जंतु, पशु-पक्षी, प्रकृति-पर्यावरण आदि के बीच मानव जीवन की समरसता स्थापित करने वाली जीवन-दृष्टि विकसित की थी. यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही. 

वे आर. एम. काॅलेज, सहरसा के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में उद्घाटनकर्ता के रूप में बोल रहे थे. यह वेबिनार  कोविड-19 के दौर में हरित प्रौद्यौगिकी की प्रासंगिकता था. उन्होंने कहा कि प्रकृति में सामान्यतः इसके सभी तत्त्व एक संतुलित अनुपात में रहते हैं. ये तत्त्व एक-दूसरे पर इस तरह निर्भर हैं कि यदि किसी एक तत्व को छेड़ा जाए, तो प्रकृति संतुलन में व्यवधान आ जाएगा. 
उन्होंने कहा कि हम चराचर जगत की एकता में विश्वास करते हैं. यही वह दृष्टि है, जो हमें पशु-पक्षियों, जानवरों, वृक्षों, पहाड़ों, नदियों की पूजा को प्रेरित करती है. उन्होंने कहा कि आज का मानव भोगवादी एवं उपभोक्तावादी जीवन जी रहा है. वह खुद को प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ प्राणी समझता है. अपने अहंकार के कारण वह प्रकृति-पर्यावरण का अनुचित शोषण कर रहा है. मनुष्य की यही  सुखवादी एवं उपभोक्तावादी प्रवृत्ति प्रवृति सभी समस्याओं की जननी है. 

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का कहना है कि प्रकृति के पास मनुष्य को देने के लिए बहुत कुछ है, वह प्रत्येक मनुष्य की आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन वह उसके लालच को कभी पूरा नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि यदि हम अपरिग्रह एवं ट्रस्टीशिप को अपने व्यवहार में लाएँ, तो प्राकृतिक संसाधनों का अनावश्यक दोहन नहीं होगा. प्राकृतिक संसाधनों का अतिदोहन रूक जाएगा और इन संसाधनों के संरक्षण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि आज हमें हरित प्रौद्यौगिकी की आवश्यकता है. हम अपने को विकसित करें, लेकिन प्रकृति- पर्यावरण का ख्याल रखें. यदि प्रकृति का अस्तित्व नहीं बचेगा, तो हमारे लिए आत्मघाती होग .हमारा अस्तित्व  अन्य जीवों और वनों की रक्षा से जुड़ा है. यह मानव-प्रजाति के स्वयं जीवित रहने की अनिवार्य शर्त दिखाई देने लगी है. इस अवसर पर जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर, एमएड विभागाध्यक्ष डॉ. बुद्धप्रिय, शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, डेविड यादव, गौरब कुमार सिंह आदि उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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