मधेपुरा: संस्कार भारती बिहार के तत्वावधान में शनिवार को कला एवं शिक्षा के उपासको के बीच प्रबोधन वर्ग की द्वितीय कड़ी का ऑनलाइन आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की शुरुआत मुजफ्फरपुर से उषा किरण और पटना से रिचा दुबे के द्वारा ध्येय गीत गायन से किया गया.
जिसमें मधेपुरा से प्रांगण रंगमंच की कविता पूनम ने भी अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी. कार्यक्रम मे विषय प्रवेश कराते हुए धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि कलाकार की रचना और उसकी प्रस्तुति ना सिर्फ देश और समाज की सांस्कृतिक साम्यर्थता को परिभाषित करता है. अपितु भविष्य का भी मार्ग प्रशस्त करता है. इसीलिए भूतकाल की समृद्धि को बताते हुए वर्तमान को गढे ताकि भविष्य उज्जवल हो.
यह कला के माध्यम से ज्यादा निपुणता से संभव है अतः कलाकार वह है जो कल को आकार दे. स्वागत उद्बोधन संस्कार भारती बिहार के अध्यक्ष पद्मश्री श्याम वर्मा के द्वारा दिया गया. कार्यक्रम के वक्ता ग्वालियर घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक, तबला वादन में स्वर्ण पदक विजेता, गीत रामायण के अनुपम गायक, अनुभवी राम कथा वाचक, युगल दंपत्ति अभय मानके व श्रीमती अमृत मानके जो इंदौर से जुड़े थे.
उन्होंने अपना उद्बोधन कलाकार की व्याख्या से की और कहा कि विपरीत परिस्थितियों में यानी अभाव में भी जो अपने प्रभाव प्रदर्शित कर दे वह कलाकार है. शब्द ब्रह्म,सुर ब्रह्म और नाद ब्रह्म तीनों का संयुक्त स्वरूप ही ब्रह्म है. उन्होंने कहा कि हमारे शरीर को मन संचालित करता है हमारे संस्कार मन को संचालित करता है. अगर हम संस्कारित होंगे तो हमसे कोई कुकृत्य नहीं होगा. इसी उद्देश्य को पाने में संस्कार भारती जैसे संगठन का बड़ा योगदान है.
कार्यक्रम के अध्यक्ष भोजपुरी के वरिष्ठ कवि दिवाकर राय ने प्रभु श्री राम को अपना आदर्श तथा पथ प्रदर्शक मानते हुए उनकी कृतियों का अनुकरण करने का आह्वान किया. संस्कार भारती के इस कार्यक्रम में 30 से अधिक इकाई के कार्यकर्ता सहित राष्ट्रीय क्षेत्रीय तथा प्रांतीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं कला साधक उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
जिसमें मधेपुरा से प्रांगण रंगमंच की कविता पूनम ने भी अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी. कार्यक्रम मे विषय प्रवेश कराते हुए धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि कलाकार की रचना और उसकी प्रस्तुति ना सिर्फ देश और समाज की सांस्कृतिक साम्यर्थता को परिभाषित करता है. अपितु भविष्य का भी मार्ग प्रशस्त करता है. इसीलिए भूतकाल की समृद्धि को बताते हुए वर्तमान को गढे ताकि भविष्य उज्जवल हो.
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| कविता पूनम |
उन्होंने अपना उद्बोधन कलाकार की व्याख्या से की और कहा कि विपरीत परिस्थितियों में यानी अभाव में भी जो अपने प्रभाव प्रदर्शित कर दे वह कलाकार है. शब्द ब्रह्म,सुर ब्रह्म और नाद ब्रह्म तीनों का संयुक्त स्वरूप ही ब्रह्म है. उन्होंने कहा कि हमारे शरीर को मन संचालित करता है हमारे संस्कार मन को संचालित करता है. अगर हम संस्कारित होंगे तो हमसे कोई कुकृत्य नहीं होगा. इसी उद्देश्य को पाने में संस्कार भारती जैसे संगठन का बड़ा योगदान है.
कार्यक्रम के अध्यक्ष भोजपुरी के वरिष्ठ कवि दिवाकर राय ने प्रभु श्री राम को अपना आदर्श तथा पथ प्रदर्शक मानते हुए उनकी कृतियों का अनुकरण करने का आह्वान किया. संस्कार भारती के इस कार्यक्रम में 30 से अधिक इकाई के कार्यकर्ता सहित राष्ट्रीय क्षेत्रीय तथा प्रांतीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं कला साधक उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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