मधेपुरा: शिक्षक हमेशा अमर रहता है. वह अपनी कीर्तियों एवं विद्यार्थियों में जीवंत रहता है. यह बात कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही. वे बुधवार को कुलपति कार्यालय परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बोल रहे थे. सभा का आयोजन हिंदी विभाग, बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा (बिहार) के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त) प्रो. इंद्रनारायण यादव के सम्मान में आयोजित किया गया था.
कुलपति ने बताया कि प्रोफेसर यादव का 18 अगस्त, 2020 को 6 बजे सुबह में ब्रेन हेमरेज होने के कारण रूबन हॉस्पिटल, पटना में निधन हो गया. वे मूलतः बी. एन. एम. भी. काॅलेज, मधेपुरा के शिक्षक थे. वहाँ वे प्रभारी प्रधानाचार्य सहित विभिन्न पदों पर रहे. विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष के रूप में आपने विभाग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
कुलपति ने कहा कि प्रोफेसर यादव ने हिंदी विभाग को आगे बढ़ाने में महती भूमिका निभाई. उनके कार्यालय में विभाग द्वारा कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया. कुलपति ने कहा कि प्रोफेसर यादव आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे और अखिल भारतीय संत मत सत्संग के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाते थे.
उन्होंने अपने लेखन के जरिए संत-साहित्य और हिंदी गद्य की समृद्धि में महती भूमिका निभाई. इससे संबंधित आपके कई शोध-आलेख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं. ‘गद्य की अधुनातन विधाएं’ आपकी महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है.
इस अवसर वित्तीय परामर्शी सुभाषचंद्र दास, वरीय संकायाध्यक्ष डाॅ. आर. के. पी. रमण, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, कुलसचिव डाॅ कपिलदेव प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार, शिक्षक संघ के महासचिव अशोक कुमार, बीएनमुस्टा के महासचिव डाॅ. नरेश कुमार, बीएओ डॉ. एम. एस. पाठक, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, डाॅ. विनोद कुमार यादव आदि उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
कुलपति ने बताया कि प्रोफेसर यादव का 18 अगस्त, 2020 को 6 बजे सुबह में ब्रेन हेमरेज होने के कारण रूबन हॉस्पिटल, पटना में निधन हो गया. वे मूलतः बी. एन. एम. भी. काॅलेज, मधेपुरा के शिक्षक थे. वहाँ वे प्रभारी प्रधानाचार्य सहित विभिन्न पदों पर रहे. विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष के रूप में आपने विभाग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
कुलपति ने कहा कि प्रोफेसर यादव ने हिंदी विभाग को आगे बढ़ाने में महती भूमिका निभाई. उनके कार्यालय में विभाग द्वारा कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया. कुलपति ने कहा कि प्रोफेसर यादव आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे और अखिल भारतीय संत मत सत्संग के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाते थे.
उन्होंने अपने लेखन के जरिए संत-साहित्य और हिंदी गद्य की समृद्धि में महती भूमिका निभाई. इससे संबंधित आपके कई शोध-आलेख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं. ‘गद्य की अधुनातन विधाएं’ आपकी महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है.
इस अवसर वित्तीय परामर्शी सुभाषचंद्र दास, वरीय संकायाध्यक्ष डाॅ. आर. के. पी. रमण, डीएसडब्लू डॉ. अशोक कुमार यादव, कुलसचिव डाॅ कपिलदेव प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार, शिक्षक संघ के महासचिव अशोक कुमार, बीएनमुस्टा के महासचिव डाॅ. नरेश कुमार, बीएओ डॉ. एम. एस. पाठक, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव, डाॅ. विनोद कुमार यादव आदि उपस्थित थे.
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