सिंहेश्वर: सिंहेश्वर यह नाम पावन पुरी के रूप में विख्यात है सिंहेश्वर का इतिहास त्रेता युग, श्रृंगी ऋषि और भगवान राम व उनके गुरु वशिष्ठ के नाम से जुड़ा हुआ है. इस की गौरव गाथा अत्यंत प्राचीन है. माना जाता है कि गुरु वशिष्ठ के कहने पर राजा दशरथ ने श्रृंगी आश्रम के पुजारी श्रृंगी ऋषि से भगवान शंकर के नाम का यज्ञ करवाया.
जिसके फलस्वरूप भगवान प्रसन्न हुए और दशरथ शाप मुक्त. इसके पश्चात राजा दशरथ को चार पुत्र प्राप्त हुए थे. इस देव स्थल का नाम श्रृंगी ऋषि के जुड़े होने के कारण वर्तमान युग में यह सिंहेश्वर के नाम से प्रसिद्ध/प्रचलित है. ऐसे प्राचीन देवस्थान को पर्यटन स्थल के रूप में बदलने के लिए 'मंदिर न्याष परिषद' को कदम उठाना चाहिए.
जिसमें मंदिर की भव्यता, आकर्षण, क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलने के साथ-साथ क्षेत्र का विकास कुछ हद तक संभव हो पाएगा.
जिसके फलस्वरूप भगवान प्रसन्न हुए और दशरथ शाप मुक्त. इसके पश्चात राजा दशरथ को चार पुत्र प्राप्त हुए थे. इस देव स्थल का नाम श्रृंगी ऋषि के जुड़े होने के कारण वर्तमान युग में यह सिंहेश्वर के नाम से प्रसिद्ध/प्रचलित है. ऐसे प्राचीन देवस्थान को पर्यटन स्थल के रूप में बदलने के लिए 'मंदिर न्याष परिषद' को कदम उठाना चाहिए.
जिसमें मंदिर की भव्यता, आकर्षण, क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलने के साथ-साथ क्षेत्र का विकास कुछ हद तक संभव हो पाएगा.
इसके लिए देश-विदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल, देव स्थल के तर्ज पर सिंहेश्वर में भी मंदिर न्याष परिषद को निम्न कदम उठाने चाहिए:
1. सिंहेश्वर की शिवगंगा/मंदिर प्रांगण में भी हो वर्ष के प्रत्येक सोमवार "सिंहेश्वर महा-आरती". अगर हो सके तो श्रावण मास के प्रत्येक दिन हो "सिंहेश्वर महा-आरती". 2.सिंहेश्वर में पर्यटन को बढ़ाने के लिए हो "विशाल पार्क" का निर्माण. 3.सिंहेश्वर मंदिर की भव्यता और आकर्षण को बढ़ाया जाए.
4 सिंहेश्वर में हो "देव भूमि संग्रहालय" का निर्माण. (जिसमें सिंहेश्वर सहित देश और सूबे के सभी प्रमुख देव स्थलों की जानकारी आगे आने वाली पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी को मिल सकेगी. )
4 सिंहेश्वर में हो "देव भूमि संग्रहालय" का निर्माण. (जिसमें सिंहेश्वर सहित देश और सूबे के सभी प्रमुख देव स्थलों की जानकारी आगे आने वाली पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी को मिल सकेगी. )
(रिपोर्ट:- रौशन वत्स)
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