मधेपुरा: कोशी के दशा की अगर बात करें तो कोशी नदी के बारे में जानना स्वभाविक हैं. यह नदी उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र की संस्कृति का पालना भी है. इसके आसपास के क्षेत्र को कोशी कहा जाता हैं. हिन्दू ग्रंथों में इसे कौशिकी नाम से जाना जाता है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी नदी के किनारे विश्वामित्र ने श्रृषि का दर्जा पाया था.
वे कौशिक श्रृषि के शिष्य थे और उन्हें ऋग्वेद में कौशिक भी कहा जाता है. सात धाराओं से मिलकर सप्त कोशी नदी बनती है जिसे स्थानीय रूप से कोशी कहा जाता हैं. वही महाभारत में इसका जिक्र कौशिकी नाम से किया जाता हैं. नेपाल में यह कंचनजंघा के पश्चिम में पड़ती हैं. कोसी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती हैं और बिहार में भीम नगर के रास्ते भारत में प्रवेश करती हैं.
बाढ़ग्रस्त जिले - बिहार के कई जिले नदियों के जलस्तर बढ जाने से प्रभावित हुए. जिनमें - सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण, खगड़िया एवं पूर्वी चम्पारण के कुल 55 प्रखण्ड का 282 पंचायत बाढ से प्रभावित हुए. लगभग 16 विभिन्न जिलों के 74 लाख 20 हजार से भी ज्यादा लोग बाढ से ग्रस्त हुए. वही राज्य में गंगा को छोड़कर सभी नदियों अपने रौद्र रुप में बहती हुई देखी गई.
वही एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी अलग अपना रौद्र रुप दिखा रही है. बिहार में बाढ अकसर भारी बारिश होने से नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र के अलावा उत्तर बिहार मे स्थिति विकराल हो जाती हैं. यह समस्या लोगों को झेलनी पड़ती है उस पर से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का खतरा, रोजी- रोजगार की चिंता अलग, बाहर से कमा कर आने वाले मजदूर जिसकी एक- एक कमाई की कीमत का आंखों के सामने बाढ में बह जाना उन्हें अंदर से कोंधता रहता है.
फिर जाना बाहर से कमा कर लाना, पैसे कमाने की चिंता, कमाये भी तो बचत न हो पाना, ऐसे विभिन्न प्रकार की समस्या परिवार की चिंता उन्हें बार- बार घर एवं मालजाल को व्यवस्थित करना होता. कोशी का रौद्र रूप लोगों ने 2008 में भी देखा था. जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी तो लाखों लोग बेघर हो गये. नेपाल के कुसहा गाँव के समीप लगभग दो किलोमीटर की लम्बाई में तटबंध (koshi Dam) के बह जाने से नेपाल के 34 गाँव समेत पूर्वोत्तर बिहार के 441 गांवों की बड़ी आबादी बाढ़ के चपेट में थी.
कुशहा त्रासदी में कोसी ने सारी मर्यादा और उत्तर बिहार के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था. जिनमें - मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, अररिया और पूणियॉ के 35 प्रखण्डो के 412 पंचायतों 993 गांवों की कुल - 33,45,545 की आबादी प्रभावित हुई.हर साल कोसी की बाढ और कटान बनी दुखों का कारण गाँव के लोगों को भाग कर इधर- उधर शरण लेनी पड़ती हैं. कोशी बांध जो भारत- नेपाल सीमा के पास नेपाल में स्थित है.
यह बांध सन् 1958 एवं 1962 के बीच बनाया गया. इसमें पानी के बहाव के नियंत्रण के लिए 56 द्वार है. बिहार सरकार से लोग अपनी आस लगाये बैठे हैं, वही सरकार द्वारा इस ओर केई कदम उठाये तो जा रहे हैं पर बाढ़ का सीज़न खत्म होते ही यह समस्या ठंडे बस्ते में रखीं प्रतीत होती हैं. जबकि यह भुलाया नहीं जा सकता कि यह कितनी गंभीर समस्या है.
(स्पेशल रिपोर्ट:- कौस्तुभ)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
वे कौशिक श्रृषि के शिष्य थे और उन्हें ऋग्वेद में कौशिक भी कहा जाता है. सात धाराओं से मिलकर सप्त कोशी नदी बनती है जिसे स्थानीय रूप से कोशी कहा जाता हैं. वही महाभारत में इसका जिक्र कौशिकी नाम से किया जाता हैं. नेपाल में यह कंचनजंघा के पश्चिम में पड़ती हैं. कोसी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती हैं और बिहार में भीम नगर के रास्ते भारत में प्रवेश करती हैं.
बाढ़ग्रस्त जिले - बिहार के कई जिले नदियों के जलस्तर बढ जाने से प्रभावित हुए. जिनमें - सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण, खगड़िया एवं पूर्वी चम्पारण के कुल 55 प्रखण्ड का 282 पंचायत बाढ से प्रभावित हुए. लगभग 16 विभिन्न जिलों के 74 लाख 20 हजार से भी ज्यादा लोग बाढ से ग्रस्त हुए. वही राज्य में गंगा को छोड़कर सभी नदियों अपने रौद्र रुप में बहती हुई देखी गई.
वही एक तरफ कोरोना जैसी वैश्विक महामारी अलग अपना रौद्र रुप दिखा रही है. बिहार में बाढ अकसर भारी बारिश होने से नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र के अलावा उत्तर बिहार मे स्थिति विकराल हो जाती हैं. यह समस्या लोगों को झेलनी पड़ती है उस पर से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का खतरा, रोजी- रोजगार की चिंता अलग, बाहर से कमा कर आने वाले मजदूर जिसकी एक- एक कमाई की कीमत का आंखों के सामने बाढ में बह जाना उन्हें अंदर से कोंधता रहता है.
फिर जाना बाहर से कमा कर लाना, पैसे कमाने की चिंता, कमाये भी तो बचत न हो पाना, ऐसे विभिन्न प्रकार की समस्या परिवार की चिंता उन्हें बार- बार घर एवं मालजाल को व्यवस्थित करना होता. कोशी का रौद्र रूप लोगों ने 2008 में भी देखा था. जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी तो लाखों लोग बेघर हो गये. नेपाल के कुसहा गाँव के समीप लगभग दो किलोमीटर की लम्बाई में तटबंध (koshi Dam) के बह जाने से नेपाल के 34 गाँव समेत पूर्वोत्तर बिहार के 441 गांवों की बड़ी आबादी बाढ़ के चपेट में थी.
कुशहा त्रासदी में कोसी ने सारी मर्यादा और उत्तर बिहार के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था. जिनमें - मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, अररिया और पूणियॉ के 35 प्रखण्डो के 412 पंचायतों 993 गांवों की कुल - 33,45,545 की आबादी प्रभावित हुई.हर साल कोसी की बाढ और कटान बनी दुखों का कारण गाँव के लोगों को भाग कर इधर- उधर शरण लेनी पड़ती हैं. कोशी बांध जो भारत- नेपाल सीमा के पास नेपाल में स्थित है.
यह बांध सन् 1958 एवं 1962 के बीच बनाया गया. इसमें पानी के बहाव के नियंत्रण के लिए 56 द्वार है. बिहार सरकार से लोग अपनी आस लगाये बैठे हैं, वही सरकार द्वारा इस ओर केई कदम उठाये तो जा रहे हैं पर बाढ़ का सीज़न खत्म होते ही यह समस्या ठंडे बस्ते में रखीं प्रतीत होती हैं. जबकि यह भुलाया नहीं जा सकता कि यह कितनी गंभीर समस्या है.
(स्पेशल रिपोर्ट:- कौस्तुभ)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....









