मधेपुरा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश के आम लोगों की बिल्कुल भी चिंता नहीं है. उन्हें सिर्फ अंबानी और अडानी से मतलब है. आज हजारों किसान दिल्ली बॉर्डर पर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. उक्त बातें जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के जिला अध्यक्ष मोहन मंडल ने कही.
वे कला भवन मधेपुरा में पार्टी के अनिश्चितकालीन धरने के तीसरे दिन बोल रहे थे. आपको बता दें कि जाप किसानों के समर्थन में तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठी हुई है. शुक्रवार को पार्टी के तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया. रविन्द्र यादव ने कहा कि मोदी सरकार मजदूर, छात्र, गरीब, दलित और किसान विरोधी है.
कल पंजाब के एक संत ने किसानों की बुरी स्थिति देखकर अपने आप को गोली मार ली. अगर ऐसी ही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में कई और किसान दम तोड़ देंगे. सरकार ने किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया है. आगे उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उग्रवादी और आतंकवादी कहना बंद करें. आज पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे भारत का हमारा प्रधानमंत्री पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली है.
अनिश्चितकालीन धरना के बारे में अनिल अनल ने कहा कि अब हम लोग या तो लड़ेंगे या मरेंगे. यह जंग हमसब बिहार के किसानों की आवाज बन कर जीतेंगे. जब तक ये काले कानून वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक जन अधिकार पार्टी (लो.) का हर नेता और कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे रहेंगे. जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के नेता रामकुमार यादव ने सुझाव दिया कि किसान और सरकार के प्रतिनिधियों की एक कमिटी बने और वो किसानों के हितों में सारे फैसले लें.
इस दौरान पार्टी के नेताओं ने कहा एमएसपी पर कानून बनाना होगा, लाठी-डंडे की सरकार नहीं चलेगी, किसानों पर जुल्म करना बंद करो जैसे नारे लगाए गए. देवाशीष पासवान और शैलेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि वे 2006 का किसान विरोधी कानून ख़त्म करें और बिहार में मंडी सिस्टम लागू करें.
इस मौके पर उपस्थित प्रियंका भारती, बीबी हुस्न्ना खातुन, फिरोजा खातुन ,युवा रंजन, राजकुमार यादव, नीतीश कुमार, प्रभू यादव, गोपी कृष्ण उर्फ विडिओ यादव, अमन कुमार रितेश,रौशन कुमार बिट्टू, सामन्त यादव, निगम राज,बुलबुल यादव, दिपक रस्तोगी, सीताराम यादव, सतीश कुमार, मुकेश यादव आदि मौजूद थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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