आपको बता दे कि ललित नारायण मिश्र के परिवारवालों ने सीबीआई को पहले ही रिप्रेजेंटेशन दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद परिवारवालों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. इस याचिका का मुख्य उद्देश्य सीबीआई द्वारा रिप्रेजेंटेशन पर एक्शन लेना बताया गया है. आखिरकार दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस विषय पर सुनवाई की और आनंद मार्गियों की अपील और परिवारवालों की याचिका को साथ सुनने का फैसला भी किया.
साल 2014 में आनंद मार्गियों को ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास कि सज़ा सुनाई गई थी लेकिन आनंद के द्वारा उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई और उन्हें बेल भी दे दिया गया. इसके साथ ही साल 2014 से ही उच्च न्यायालय में अपील लंबित पड़ा हुआ है. ललित नारायण मिश्र के पौत्र और दिल्ली उच्च न्यायालय में अधिवक्ता वैभव मिश्रा ने सीबीआई को नवंबर 2020 में रिप्रेजेंटेशन देते हुए फिर से जांच करवाने की मांग भी की थी. इसके बाद सीबीआई के द्वारा किसी भी प्रकार से इसपर संज्ञान नहीं लेने की वजह से वैभव मिश्रा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की.
अब यह फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के डिविजनल बेंच के द्वारा एक साथ सुना जाएगा. ललित नारायण मिश्र की हत्या के 45 साल के बाद भी गुत्थी अभी तक सुलझ नहीं पाई है. ललित नारायण मिश्र की हत्या 2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर एक विस्फोट के दौरान हो गई थी. उसके बाद से इस रहस्य का खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है. उनके परिवार के द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि अभी तक उनके हत्यारों को सज़ा नहीं मिल पाई है.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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