लौकिक संस्कृति के इंद्रधनुषी रंगों का त्योहार है होली - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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16 मार्च 2022

लौकिक संस्कृति के इंद्रधनुषी रंगों का त्योहार है होली

मधेपुरा: आज जब लोगों के बीच दूरियां बढ़ने लगी है इंसान खुद तक सीमित होने लगा है ऐसे में होली जैसे पर्व की प्रासंगिकता बहुत बढ़ जाती है. उक्त बातें वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने संगठन की ओर से होली के पूर्व आयोजित छोटे छोटे बच्चों के बीच होली मिलन में कहीं. उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारे को प्रगाढ़ बनाने वाला होली लोगों के बीच की दूरी को इस अंदाज में पाट देता है कि सामने वाले को पता भी नहीं चलता. 

वास्तव में यह लौकिक संस्कृति के इंद्रधनुषी रंगों का त्योहार है।इसमें लोग हर बात को पीछे छोड़ प्रेम बांटने का काम करते हैं।हिंदी भाषी राज्यों के प्रमुख पर्वों में शुमार होली विभिन्न राज्यों में अलग अलग रूपों में मनाया जाता है. वसंत ऋतु के आगमन का सूचक भी इसे कहा जाता है. इस अवसर पर छात्र नेता राठौर ने कहा कि इस पर्व को प्रेम और सौहार्द के साथ मनाना चाहिए कुछ अवसरों पर माहौल हिंसक रूप भी धारण कर लेता है जो गलत है.  
बच्चों से उन्होंने अपील किया कि ऐसे रंगों का प्रयोग बिल्कुल न करें जो स्कीन के लिए घातक हो. छात्र मौसम व छात्रा प्रियंका के संचालन में चले कार्यक्रम में बच्चों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और जिलेबी का आनन्द भी लिया. मौके पर कई छात्र छात्राएं उपस्थित रहे. 
(रिपोर्ट:- ईमेल) 
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