डेस्क: कोसी नदी के तट पर बसे सहरसा जिला में भूमि विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस मामले में न तो स्थानीय सीओ कुछ कर रहे हैं और न ही थाना पुलिस. जिससे विवाद को रोकने के लिए दोनों पक्षों पर कार्रवाई हो सके. भूमि विवाद मामले में अगर गौर किया जाए तो ज्यादातर मामले में कमजोर व सभ्य लोग ही इसका शिकार हो रहे हैं. दबंग व अपराधी प्रवृत्ति के लोग जबरन भूमि पर कब्जा जमाकर बैठे हुए हैं. कई मामले में भू-स्वामी को टाइटल में डिग्री भी हो चुकी है, लेकिन दबंगों के डर से असली भू-स्वामी जमीन पर अपना अधिकार नहीं कर पा रहे हैं. आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस भी इस मामले से पल्ला झाड़ती नजर आती है.
ऐसे मामले में पुलिस का कहना है कि दखल दिहानी आदेश के बाद ही उक्त मामले में कुछ कर सकते हैं. बता दें कि सहरसा जिला के सुलिंदाबाद में कई ऐसे लोग हैं जो न्यायालय के आदेश के बाद भी कई वर्षों से अपनी निजी जमीन पर भवन निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं. इसको लेकर प्रखंड से लेकर जिला तक के पदाधिकारी को वे लोग अर्जी देते-देते थक गए हैं लेकिन अब तक इस मामले में किसी ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. जिस कारण आए दिन मारपीट, गाली - गलौज जैसी अभद्रता होती रहती है.
लोगों को यह भी डर रहता है कि कहीं इस चपेट में कोई बड़ी घटना न हो जाए. अवैध जमीन पर कब्जा करने वाले नंदकिशोर गुप्ता, ललिता देवी, दीपक कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार, ज्योति गुप्ता, किरण गुप्ता सहित आदि लोग आपस में ही (घर के सदस्य) लड़ाई करते हैं और स्थानीय थाना पहुँचकर जमीन मालिकों पर झूठा केस दर्ज करवा देते हैं और पुलिस प्रशासन भी पैसा लेकर उन लोगों का खूब साथ देती है. जिससे उन लोगों का मनोबल चरम पर है. यही कारण है कि भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों का मनोबल बढ़ रहा है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पुलिस प्रशासन न्यायालय के आदेश के बावजूद भी भूमि मालिकों को दखल दिलवाने में असमर्थ है तो भूमि मालिक जाएँ तो कहाँ जाएँ. अगर कानूनी व्यवस्था चरमरा गई है तो ऐसा न हो कि ऐसे लोग आपस में ही हत्या करने को विवश हो जाए और कानून के मुजरिम बन जाएँ.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
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