मधेपुरा: सोशल मीडिया पर तैर रही एक कार्ड में 18 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर के न्यू कैंपस में आयोजित होने और अध्यक्षता बीएनएमयू कुलपति द्वारा किए जाने की खबर पर पूर्व वाम छात्र नेता डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शैक्षणिक परिसर एवं कुलपति के पद के गरिमा का अपमान बताया है. डॉक्टर राठौर ने कहा कि गर यह सत्य है तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं आखिर विश्वविद्यालय जैसी शैक्षणिक संस्था के परिसर में उस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कार्यक्रम की अनुमति कैसे दी गई जिसकी गतिविधि समाज, राष्ट्र, संविधान की सुरक्षा,अखंडता पर संकट के रूप में ही नहीं देखी जाती बल्कि भारत के धर्मनिरपेक्षता के लिए खतरे के रूप में देखी जाती है. उससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि उस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति के द्वारा किया जाना है जो विश्वविद्यालय जैसी शैक्षणिक संस्था के सर्वोच्च पद की गरिमा के खिलाफ है. वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी रहे डॉक्टर राठौर ने कहा कि सर्वाधिक हास्यास्पद तो यह है कि एक ओर कुलपति राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करने जा रहे हैं दूसरी ओर उन्हीं के विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए गेस्ट फैकल्टी को दस महीने से पहले वेतन का इंतजार है. विश्वविद्यालय के उन गेस्ट फैकल्टी को जिसकी नियुक्ति के 10 महीने बाद भी अभी तक उन्हें वेतन मिलना शुरू नहीं हुआ है उनके घर में चूल्हा चौकी पर संकट आ गया है. दुकानदार उधार देने से मना कर रहा है आलम तो यहां तक है कि कॉलेज जाने आने और इज्जत बचाने में सारी जमा पूंजी जा रही तब राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की बात पर मंथन की अध्यक्षता सरासर नाइंसाफी ही नहीं लगती बल्कि बीएनएमयू के शिक्षकों का अपमान लगता है. राठौर ने स्पष्ट शब्दों में कुलपति को लिखे पत्र में कहा है कि अविलंब फैसले पर पुनर्विचार हो क्योंकि यह विश्वविद्यालय सरीखे परिसर और उसके सर्वोच्च पद की गरिमा का सवाल है. वहीं राठौर ने चेताया भी है कि अगर कार्यक्रम में सहभागिता रही तो इसका पुरजोर विरोध ही नहीं होगा बल्कि राजभवन,राष्ट्रपति भवन,यूजीसी से पत्राचार भी किया जाएगा.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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