डॉ. शेखर ने चार सवाल उठाए हैं. एक, सुपौल जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों को पचास से सौ किलोमीटर दूर जाकर मूल्यांकन कार्य करने को बाध्य क्यों किया जा रहा है?दो, शिक्षकों को सुपौल के विभिन्न महाविद्यालयों से प्रतिदिन सहरसा जाने-आने अथवा सहरसा में रहने में जो खर्च आएगा, वह कब मिलेगा? तीन, क्या सुपौल जिले में कोई महाविद्यालय मूल्यांकन केंद्र बनाने के लायक नहीं है? चार, क्या सुपौल जिले के कोई भी प्रधानाचार्य केंद्राधीक्षक के रूप में मूल्यांकन कार्य संपन्न कराने में सक्षम नहीं हैं? अतः डॉ. शेखर ने अनुरोध किया है कि सुपौल जिले में भी मूल्यांकन केंद्र बनाया जाए. पूर्व की तरह मूल्यांकन कार्य से संबंधित नब्बे प्रतिशत राशि अग्रिम के रूप में केंद्राधीक्षक को भेजना सुनिश्चित किया जाए, ताकि मूल्यांकन से संबंधित पारिश्रमिक का ससमय भुगतान सुनिश्चित किया जा सके. मूल्यांकन मद के पूर्व के सभी बकाया राशि का अविलंब भुगतान किया जाए.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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