सुपौल जिले के किसी महाविद्यालय में भी मूल्यांकन केंद्र बनाने की मांग - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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17 जुलाई 2026

सुपौल जिले के किसी महाविद्यालय में भी मूल्यांकन केंद्र बनाने की मांग

सुपौल: बीएनएमयू परीक्षा विभाग द्वारा लगातार विभिन्न परीक्षाओं का मूल्यांकन केंद्र सुपौल जिला को छोड़कर मधेपुरा जिला एवं सहरसा जिला में बनाए जाने को लेकर विरोध का स्वर तीव्र हो रहा है. बीएनएमयू , मधेपुरा के सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर ने कुलसचिव बी. एस झा को पत्र लिखकर इस पर कडा़ ऐतराज जताया है और कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह रवैया संविधान प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकारों के प्रतिकूल है और इसमें क्षेत्रीय संकीर्णता की बू भी आती है. उन्होंने बताया कि संप्रति स्नातक पंचम सेमेस्टर का मूल्यांकन कार्य शुरू होने वाला है। इस निमित्त मधेपुरा जिला एवं सहरसा जिला में मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है, लेकिन सुपौल जिले के किसी भी महाविद्यालय में कोई केंद्र नहीं बनाया गया है. इस कड़ी में सुपौल के विभिन्न महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को एम. एल. टी. कॉलेज, सहरसा में मूल्यांकन कार्य करना है. यदि एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर की बात करें, तो यहां से सहरसा की दूरी लगभग सौ किलोमीटर है. 


डॉ. शेखर ने चार सवाल उठाए हैं. एक, सुपौल जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों को पचास से सौ किलोमीटर दूर जाकर मूल्यांकन कार्य करने को बाध्य क्यों किया जा रहा है?दो, शिक्षकों को सुपौल के विभिन्न महाविद्यालयों से प्रतिदिन सहरसा जाने-आने अथवा सहरसा में रहने में जो खर्च आएगा, वह कब मिलेगा? तीन, क्या सुपौल जिले में कोई महाविद्यालय मूल्यांकन केंद्र बनाने के लायक नहीं है? चार, क्या सुपौल जिले के कोई भी प्रधानाचार्य केंद्राधीक्षक के रूप में मूल्यांकन कार्य संपन्न कराने में सक्षम नहीं हैं? अतः डॉ. शेखर ने अनुरोध किया है कि सुपौल जिले में भी मूल्यांकन केंद्र बनाया जाए. पूर्व की तरह मूल्यांकन कार्य से संबंधित नब्बे प्रतिशत राशि अग्रिम के रूप में केंद्राधीक्षक को भेजना सुनिश्चित किया जाए, ताकि मूल्यांकन से संबंधित पारिश्रमिक का ससमय भुगतान सुनिश्चित किया जा सके. मूल्यांकन मद के पूर्व के सभी बकाया राशि का अविलंब भुगतान किया जाए.

(रिपोर्ट:- ईमेल)

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