केन्द्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ मंगलवार को भाकपा कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय के समीप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। पुतला दहन के पूर्व भाकपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से बीपी मंडल चौक तक प्रतिरोध मार्च निकाला। पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को निरस्त कर लोकसभा में बिना बहस कराए केन्द्र की मोदी सरकार ने जो नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाया है। वह किसान विरोधी और कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने वाला भूमि अधिग्रहण बिल है। यह अध्यादेश किसानों के लिए काला अध्यादेश माना जाएगा। नये अध्यादेश में जमीन मालिकों की सहमति, वर्तमान के चार गुणा से दस गुणा तक मुआवजा, विस्थापितों को पुर्नवास, खेती पर निर्भर मजदूरों को बीस वर्षो तक दो हजार रूपये प्रति माह देने आदि का प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। नये अध्यादेश में देशी विदेशी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं बिल्डरों के लिए दरवाजे खोल दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि नये भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को केन्द्र सरकार वापस ले अन्यथा भाकपा चरणबद्ध तरीके से आन्दोलन जारी रखेगी। भाकपा जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि मोदी सरकारी की भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के अनुसार जमीन मालिक के इच्छा के विरोध के बाद भी डीएम जबरन जमीन का अधिग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने सरकार के इस फैसले को फासिस्ट कार्रवाई बताया। कार्यक्रम में भाकपा नेता बीरेन्द्र नारायण सिंह, दिलीप पटेल, पंकज सादा, नवीन कुमार, दशरथ यादव, नौजवान संघ के जिला सचिव शंभू क्रांति, छात्र नेता मो. चांद, सुनील कुमार, सचिन कुमार, मोहन सिंह, संजय भगत, वसीम उद्दीन, अनुज कुमार, विकास कुमार, संतोष यादव आदि मौजूद थे।
केन्द्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ मंगलवार को भाकपा कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय के समीप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया। पुतला दहन के पूर्व भाकपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से बीपी मंडल चौक तक प्रतिरोध मार्च निकाला। पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे पार्टी के राज्य कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को निरस्त कर लोकसभा में बिना बहस कराए केन्द्र की मोदी सरकार ने जो नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाया है। वह किसान विरोधी और कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचाने वाला भूमि अधिग्रहण बिल है। यह अध्यादेश किसानों के लिए काला अध्यादेश माना जाएगा। नये अध्यादेश में जमीन मालिकों की सहमति, वर्तमान के चार गुणा से दस गुणा तक मुआवजा, विस्थापितों को पुर्नवास, खेती पर निर्भर मजदूरों को बीस वर्षो तक दो हजार रूपये प्रति माह देने आदि का प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। नये अध्यादेश में देशी विदेशी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं बिल्डरों के लिए दरवाजे खोल दिये गए हैं। उन्होंने कहा कि नये भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को केन्द्र सरकार वापस ले अन्यथा भाकपा चरणबद्ध तरीके से आन्दोलन जारी रखेगी। भाकपा जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि मोदी सरकारी की भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के अनुसार जमीन मालिक के इच्छा के विरोध के बाद भी डीएम जबरन जमीन का अधिग्रहण कर सकते हैं। उन्होंने सरकार के इस फैसले को फासिस्ट कार्रवाई बताया। कार्यक्रम में भाकपा नेता बीरेन्द्र नारायण सिंह, दिलीप पटेल, पंकज सादा, नवीन कुमार, दशरथ यादव, नौजवान संघ के जिला सचिव शंभू क्रांति, छात्र नेता मो. चांद, सुनील कुमार, सचिन कुमार, मोहन सिंह, संजय भगत, वसीम उद्दीन, अनुज कुमार, विकास कुमार, संतोष यादव आदि मौजूद थे।







