पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहें - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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28 जुलाई 2015

पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहें

27/07/15 पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का सोमवार को शिलांग में एक व्याख्यान के दौरान  बेहोश होकर गिरने के बाद निधन हो गया.  84 वर्षीय कलाम शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक व्याख्यान के दौरान गिर पड़े और इसके तुरंत बाद उन्हें नानग्रिम हिल्स में बेथनी अस्पताल ले जाया गया.  मुख्य सचिव पीबीओ वरजीरी ने अस्पताल के बाहर बताया कि उन्होंने कल सुबह कलाम के पार्थिव शरीर को गुवाहाटी से दिल्ली ले जाने के लिए जरूरी प्रबंध करने के वास्ते केंद्रीय गृह सचिव एल सी गोयल से बात की है. खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक एम खारकरांग ने इससे पूर्व बताया था, ‘‘पूर्व राष्ट्रपति को नाजुक हालत में बेथनी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.’’ उन्होंने बताया था कि पूर्व राष्ट्रपति शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक व्याख्यान के दौरान गिर पड़े और उन्हें तुरंत मेघालय की राजधानी में नानग्रिम हिल्स में एक अस्पताल में ले जाया गया जहां उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती किया गया.  सैन्य अस्पताल और नार्थ इस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (एनईआईजीआरआईएचएमएस) के डाक्टर बेथनी अस्पताल पहुंच गए.  राज्यपाल वी षणमुगम, स्पीकर अबू ताहिर मंडल, गृह मंत्री रोशन वारजिरी, मुख्य सचिव और डीजीपी राजीव मेहता भी तुरंत अस्पताल पहुंचे.  केन्द्रीय गृह सचिव एल सी गोयल ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा करेगी
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                                                                संक्षिप्त जीवनी
पूर्व राष्ट्रपति का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग परिवार में हुआ था. अब्दुल कलाम सयुंक्त परिवार में रहते थे. परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं 5 भाई एवं 5 बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे. अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा. वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए.

                                                          डॉ कलाम की उपलब्धियां
कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया. 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहां उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई. परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था. कलाम 1962 में वे 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' में आये. डॉक्टर कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ.  1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था. इस प्रकार भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है.  उनकी देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ. डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के ग्यारवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे.  इन्हें 25 जुलाई 2002 को संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई. इनका कार्याकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ.  इन्होंने अपनी जीवनी 'विंग्स ऑफ़ फायर' भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी थी. इनकी दूसरी पुस्तक 'गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ द पर्पज ऑफ़ लाइफ' आत्मिक विचारों को उद्घाटित करती है इन्होंने तमिल भाषा में कविताऐं भी लिखी हैं. 

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