माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी के नाम से जाना जाता. इस दिन मां सरस्वती की विधि विधान के साथ पूजा की जाती है. मां सरस्वती को वाक् देवी के नाम से भी जाना जाता है. शिक्षा प्रारंभ करने के लिए भी इस दिन को शुभ माना गया है. जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों में हंस वाहिनी विद्या की देवी मां शारदे की अराधना धूम धाम से की जायेगी. सभी सरकारी व गैरसरकारी विद्यालय महाविद्यालय सहित कोचिंग सेंटर व क्लबों में पूजा की तैयारी पूरी की जा चकूी है. शहर में कई जगहों पर भव्य पूजा पंडाल बन कर तैयार हो गया है. शुक्रवार को सुबह से लेकर शाम तक पूजा का आयोजन किया जायेगा. वहीं पूजा पंडालों में प्रसाद वितरण का कार्यक्रम किया जायेगा. पूजा के मौके पर कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित की जायेगी. शहर के चौक-चौराहों के अलावा निजी विद्यालयों को भव्य पंडाल का रूप देकर आकर्षक ढंग से सजाया गया है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के कई जगहों पर सरस्वती जन्मोत्सव के मौके पर मेले का आयोजन भी किया जाता है. यहीं वजह है कि मिथिलांचल के घर-घर में मां सरस्वती की पूजा लोग करते हैं. खासकर गली-गली में स्थापित प्रतिमा व दर्शन को निकले श्रद्धालु की भीड़ मनमोहक होती है.
(रिपोर्ट:मधेपुरा:- गरिमा उर्विशा)








