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| सदर थाना स्थित पुलिस बैरक |
मधेपुरा
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने की नसीहत देने वाली पुलिस की जिंदगी खुुद सुरक्षित नहीं हैै। आलम यह है कि जिले के थानों में न तो मास्क की व्यवस्था की गई है और न ही सैनिटाइजर का। दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की सुरक्षा से बेपरवाह थानाध्यक्ष थाना में काम कर रहे जिन पुलिस पदाधिकारियों व जवानों के बदौलत विधि व्यवस्था के संधारण के साथ लॉक डाउन को प्रभावी बनाने का दंभ भर रहे हैं, उनकी हाथ की सफाई के लिए महज पांच रुपए का साबुन खरीदने के लिए भी उनके पास रुपए नहीं है।
हालांकि कोरोना के संक्रमण के प्रति संवेदनशील कुछ पुलिस पदाधिकारी व कर्मी अपने पॉकेट से रुपए खर्च कर मास्क तो खरीद लिए हैं, किंतु थाना पहुंचते ही उसके हाथ व हथियार को सैनिटाइज करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। वरीय पदाधिकारी के इस असंवेदनशीलता से पुलिस पदाधिकारी खासा नाराज हैं।
नाम नहीं छापने के शर्त पर पुलिस कर्मियों ने बताया कि वे लाेग बैरेक में जानवर की तरह रह रहे हैं। एक फीट की दूरी पर लगे बिछावन के नीचे गंदगियों का साम्राज्य है। इस हालत में अगर वे कोरोना के खूनी पंजे का शिकार हो जाते हैं तो उनकी सुरक्षा कौन करेगा। एसपी संजय कुमार ने बताया कि पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए मास्क तथा सैनिटाइजर की व्यवस्था के लिए सिविल सर्जन को कहा गया था। किंतु इतनी मात्रा में इसकी उपलब्धता नहीं होने के कारण अभी तक इसकी आपूर्ति नहीं की गयी। वैसे इतनी छोटी व्यवस्था थानास्तर पर भी थानाध्यक्ष के द्वारा की जा सकती है।
पुलिस बैरक की हालत तबेला से भी बदतर :
देश में महामारी का रुप धारण कर चुके कोरोना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने वाली पुलिस दिन-रात एक कर दी है। सरकार व वरीय पदाधिकारी के सख्त निर्देश पर वे सुबह से देर रात तक सड़कों पर चक्कर लगाते रहते हैं। किंतु देर रात जब वे छोटे से बैरक में एक फीट की दूरी पर लगे गंदे व बदबूदार बिछावन पर सोने जाते हैं तो उनको अंदर से कोरोना का भय सताने लगता है।
बैरक की हालत तबेला से भी बदतर है। इतने गंदे जगह में किसी को अगर सुरक्षा में हो रही चूक के कारण अगर कोरोना अपना शिकार बना लें तो यह पुलिस प्रशासन के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न कर सकता है। बहरहाल पुलिसकर्मी चिंतित हैं। क्योंकि अपने फर्ज का पालन करने के अलावा उनके पास दूसरा कोई चारा भी नहीं है। लिहाजा हर रोज उनकी जिंदगी की नई सुबह होती है, जिसमें वे कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए अपने जान पर खेलकर शासन व प्रशासन द्वारा घोषित युद्ध में शामिल हो जाते हैं।









