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| कुलपति अवध किशोर राय |
भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में दर्शन परिषद्, बिहार का राष्ट्रीय अधिवेशन 20-22 मार्च तक आयोजित होने जा रहा है. इसका मुख्य विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति है. शिक्षा, समाज एवं संस्कृति में गहरा संबंध है. इन तीनों के विभिन्न आयामों पर विचार करना ही इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य है. आयोजन सचिव सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि पूरा अधिवेशन शिक्षा, समाज एवं संस्कृति पर ही केन्द्रित है.
इसी को केंद्र में रखकर 20 एवं 21 मार्च को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी मुख्य फोकस शिक्षा, समाज एवं संस्कृति पर ही होगा. इसमें मधेपुरा के प्रांगण रंगमंच, नवाचार रंगमंडल, सृजन दर्पण, इप्टा एवं राधा-कृष्ण संगम ट्रस्ट आदि से जुड़े कलाकारों द्वारा कोसी के समाज एवं संस्कृति के विभिन्न आयामों को सामने लाया जाएगा. इसके अलावा दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल स्कूल, किरण पब्लिक स्कूल और माया विद्या निकेतन आदि के बच्चे कोसी में शिक्षा के बढ़ते कदम को रेखांकित करेंगे.
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| डॉ. ज्ञानजय द्विवेदी |
आयोजन समिति के स्वागताध्यक्ष सह ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के प्रधानाचार्य डॉ. के. पी. यादव ने बताया कि अधिवेशन के अवसर पर 'बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत' पर विशेष संगोष्ठी होगी. इसके जरिए पूरे बिहार और विशेषकर कोसी की विरासत को सामने लाया जाएगा. मालूम हो कि मधेपुरा जिले की स्थापना मई 1981 में हुई. यह उत्तर में अररिया एवं सुपौल, दक्षिण में खगड़िया एवं भागलपुर, पूरब में पूर्णियाँ और पश्चिम में सहरसा जिला से घिरा है.
यह शहर ऐतिहासिक, धार्मिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक दृष्टि से काफी समृद्ध है. चंडी स्थान, सिंहेश्वर स्थान, महर्षि मेंही अवतरण भूमि, कारू खिरहर स्थान, बाबा बिसु राउत धाम आदि यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं. यह मंडन-भारती, लक्ष्मीनाथ गोसाईं आदि दार्शनिकों की भूमि है. सम्मेलन के दौरान इन सबों के योगदानों की चर्चा होगी. मानविकी संकायाध्यक्ष सह दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने बताया कि अधिवेशन की तैयारी चल रही है और इसको लेकर जनमानस में भी काफी उत्साह है.
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| डॉ. सुधांशु शेखर |
अधिवेशन के अवसर पर एक स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा. इसके लिए गृह मंत्री अमित साह, राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान सहित कई गणमान्य राजनेताओं एवं शिक्षाविदों का शुभकामना संदेश प्राप्त हो चुका है. लगातार देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग 400 विद्वानों के शोध-सार प्राप्त हुए हैं. कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय ने यथाशीघ्र स्मारिका तैयार करने, पूरे कार्यक्रम को अंतिम रूप देने और सभी प्रकार की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं.
कुलपति ने कहा है कि यह अधिवेशन बीएनएमयू में पहली बार आयोजित होने जा रहा है. इससे बिहार और पूरे देश में हमारे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ेेगी. प्रति कुलपति डाॅ. फारूक़ अली ने बताया कि यह अधिवेशन बीएनएमयू के युवा शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर है. यह अधिवेशन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रायोजित है. इसलिए इसके प्रणाम-पत्र को सभी जगह मान्यता रहेगी. इसमें उत्कृष्ट आलेखों पर पुरस्कार भी दिए जाएँगे, जो कैरियर में मददगार होगा.
(रिपोर्ट:- ईमेल)











