मुजफ्फरपुर: सांस्कृतिक यात्रा की अनुमति नहीं मिलने पर मंगलवार को कलाकारों ने नुक्कड़ नाटकों के जरिए इसका विरोध किया. कलाकार महासंघ मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में पूर्व से घोषित सांस्कृतिक यात्रा शहीद जुब्बा सहनी पार्क से खुदीराम बोस स्मारक तक निकलनी थी. इसके लिए प्रशासन ने अनुमति नहीं दी.
शहीद जुब्बा सहनी पार्क में मौजूद तमाम संस्कृतिकर्मियों ने एक स्वर में कहा कि उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती है और वे एकजुट होकर प्रतिरोध करेंगे. रंगकर्मियों ने नुक्कड़ नाटकों का मंचन कर सत्ता और मुजफ्फरपुर के पूर्व व वर्तमान नेतृत्व की विफलता को अपने अभिनय और संगीत के जरिए पेश किया.
वहीं गायकों ने गीत-संगीत से लोक जागृति पैदा की. संस्कृतिकर्मियों की मांग का समर्थन करते हुए कवि-गीतकार डॉ. संजय पंकज ने कहा कि कलाकारों का मुद्दा राजनीति से बिल्कुल अलग है. कहने भर के लिए मुजफ्फरपुर सांस्कृतिक राजधानी है, मगर संस्कृतिकर्मियों के लिए कोई सुविधा नहीं है. लॉकडाउन के समय में सबको मुआवजा दिया गया, मगर कलाकार अभावग्रस्त रहे.
मौके पर अविनाश तिरंग, डॉ रामेश्वर द्विवेदी, कुमार विरल, स्वाधीन दास, कामेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ रंजना सरकार, असीम सिन्हा, डॉ अरविंद कुमार, इंदुबाला शर्मा, रमेश रत्नाकर, अमित पटेल बच्चा भारती सहित दर्जनों कलाकार मौजूद थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
पब्लिसिटी के लिए नहीं पब्लिक के लिए काम करना ही पत्रकारिता है....
शहीद जुब्बा सहनी पार्क में मौजूद तमाम संस्कृतिकर्मियों ने एक स्वर में कहा कि उनकी आवाज नहीं दबाई जा सकती है और वे एकजुट होकर प्रतिरोध करेंगे. रंगकर्मियों ने नुक्कड़ नाटकों का मंचन कर सत्ता और मुजफ्फरपुर के पूर्व व वर्तमान नेतृत्व की विफलता को अपने अभिनय और संगीत के जरिए पेश किया.
वहीं गायकों ने गीत-संगीत से लोक जागृति पैदा की. संस्कृतिकर्मियों की मांग का समर्थन करते हुए कवि-गीतकार डॉ. संजय पंकज ने कहा कि कलाकारों का मुद्दा राजनीति से बिल्कुल अलग है. कहने भर के लिए मुजफ्फरपुर सांस्कृतिक राजधानी है, मगर संस्कृतिकर्मियों के लिए कोई सुविधा नहीं है. लॉकडाउन के समय में सबको मुआवजा दिया गया, मगर कलाकार अभावग्रस्त रहे.
मौके पर अविनाश तिरंग, डॉ रामेश्वर द्विवेदी, कुमार विरल, स्वाधीन दास, कामेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ रंजना सरकार, असीम सिन्हा, डॉ अरविंद कुमार, इंदुबाला शर्मा, रमेश रत्नाकर, अमित पटेल बच्चा भारती सहित दर्जनों कलाकार मौजूद थे.
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