चुनाव टालने के क्या हैं कारण
बिहार पंचायत चुनाव में ईवीएम को लेकर द्वन्द चल रहा है. लिहाजा सिंगल और मल्टी पोस्ट ईवीएम की दुविधा के कारण निर्णय लेने में देर हो रही है. भारत निर्वाचन आयोग अपनी ईवीएम से चुनाव करवाना चाहता है. वहीं राज्य चुनाव आयोग का कहना है की चुआव 6 पदों के लिए कराया जाना है, जिसके लिए मल्टी पोस्ट ईवीएम की आवश्यकता है. मसला यह है कि जबतक भारत निर्वाचन आयोग मल्टी पोस्ट ईवीएम खरीदने के लिए अनुमति नहीं देगा तबतक राज्य चुनाव आयोग मल्टी पोस्ट ईवीएम नहीं खरीद सकता है.
पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर
बिहार राज्य चुनाव आयोग ने मल्टी पोस्ट ईवीएम खरीदने के लिए पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. हाईकोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को आपसी सहमति से इसका हल निकालने का फरमान दिया है. अब जबतक इस ईवीएम के मसले का कोई निष्कर्ष नहीं निकल जाता है. बिहार पंचायत चुनाव मामले में कुछ भी कह पाना मुश्किल है.
ये मुखिया उम्मीदवार अयोग्य करार दिए जायेंगे
बिहार पंचायत चुनाव के मुखिया पद के उम्मीदवारों के लिए पंचायती राज विभाग ने रविवार को एक आदेश निर्गत किया है. पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने इसमें कहा है कि 1 मार्च 2020 तक हुए खर्चों का अंकेक्षण पूरा नहीं करानेवाले मुखिया अयोग्य घोषित किये जायेंगे. पंचायती राज अधिनियम के अनुसार समय पर अंकेक्षण कराना अनिवार्य है. यदि कोई मुखिया अंकेक्षण कार्य में असफल हैं तो विभाग यही समझेगा कि उक्त प्रतिनिधि संवैधानिक दायित्व को निभाने में असफल हैं. उन्हें अयोग्य घोषित क्र दिया जायेगा. आदेश में उन्होंने सभी मुखिया को उपयोगिता प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से जमा करने के लिए कहा है.
विभाग ने चेतावनी देते हुए कही थी यह बड़ी बात
विदित हो कि कुछ ही दिनों पहले पंचायती राज विभाग ने कहा था कि जो मुखिया नल-जल योजना को तत्परता से संपन्न नहीं करेंगे उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. विभाग ने चेतावनी देते हुए बताया था कि अयोग्य घोषित करने के प्रस्ताव पर विभाग द्वारा काम किया जा रहा है. नल-जल योजना में लापरवाही बरतने या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में पकड़े जानेवाले मुखिया पर प्राथमिकी दर्ज किया जायेगा.
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