पिछले वर्ष दस फ़रवरी को जारी अधिसूचना के एक साल पूरा होने के बाद भी बीएड ऑन स्पॉट एडमिशन में हुई धांधली व अन्य मुद्दों पर जांच प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर वाम छात्र संगठन एआईएसएफ की बीएनएमयू इकाई ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे बेशर्मी से भी परे की हरकत बताया. संगठन के बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि दुखद है कि पिछले साल नौ जनवरी को हुई अभिषद की बैठक में बीएड से जुड़े सभी मुद्दों की जांच को लेकर एक जांच कमिटी बनाई गई थी. एआईएसएफ के लगातार आंदोलन के बाद बैठक के एक माह बाद दस फ़रवरी को अधिसूचना जारी की गई जिसने समय सीमा और अध्यक्ष, सचिव का उल्लेख नहीं था.
एआईएसएफ की शिकायत पर उसमें संशोधन कर फिर से जारी करते हुए दस दिन में रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया. लेकिन जांच कमिटी उसको लेकर कभी इमानदार पहल करती नजर नहीं आई. संगठन ने लगातार विरोध किया तो कभी कभी जांच की हलचल दिखाई गई लेकिन आज तक मूर्त रूप नहीं दिया जा सका. छात्र नेता राठौर ने साफ शब्दों में कहा कि जांच टीम के सदस्यों पीड़ित छात्रों के साथ न्याय करने के बजाय इसे अपने हित में भजाया और हित की रोटी जमकर सेंकी. दोषियों को बचाने के लिए पीड़ित छात्रों को बलि का बकरा बना दिया गया. एआईएसएफ इस मनमानी को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा.
दस दिन की जगह एक साल में भी रिपोर्ट नहीं दे पाई जांच टीम की करतूत से समाज को अवगत भी कराया जाएगा और उनकी घटिया नियत व सोच के विरोध में उनकी बरखी मनाते हुए बाल मुंडवाकर विरोध किया जाएगा. साथ ही बरखी का भोज भी आयोजित होगा जो इस बात का प्रमाण होगा कि जांच कमिटी मृतप्राय हो चुकी है. एआईएसएफ किसी कीमत पर छात्रों की अनदेखी और पदाधिकारियों की मनमानी स्वीकार नहीं करेगा. आखिरी दम तक संघर्ष जारी रहेगा दोषियों पर हर हाल में कारवाई विश्वविद्यालय को करनी होगी. वहीं छात्र नेता राठौर ने कहा कि यह विचारणीय प्रश्न है कि ऐसे पदाधिकारियों को शर्म नाम मात्र की भी नहीं आती की नामांकन में धांधली, रोस्टर की अनदेखी, छात्रों के शोषण से जुड़े अनेकानेक साक्ष्य देने के बाद भी वो पहल नहीं कर पाते ऐसे लोगों को समाज में बेनकाब करने की जरूरत है.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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