मधेपुरा: वर्ष 2020 में हुए बीएड ऑन स्पॉट एडमिशन में हाई कोर्ट के आदेश को ताक पर रख जमकर हुई रोस्टर की अनदेखी,सीट से ज्यादा नामांकन आदि मुद्दों के जांच को लेकर बनी जांच कमिटी द्वारा दस दिन के जगह एक साल दो माह बाद भी रिपोर्ट नहीं देने व एम्एड एंट्रेंस टेस्ट का रिजल्ट डेढ़ माह बाद भी नहीं देने से बौखलाए वाम छात्र संगठन एआईएसएफ की बीएनएमयू इकाई ने सोमवार को बीएनएमयू मुख्य द्वार पर संगठन के बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर के नेतृत्व में जमकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच कमिटी के खिलाफ मोटी रकम लेकर दोषियों को बचाने का आरोप लगाते हुए जांच कमिटी का पुतला दहन किया.
पूर्व एआईएसएफ नेता शम्भु क्रांति ने इस मौके पर कहा कि बीएनएमयू में भ्रष्टाचार चरम पर आ गया है पदाधिकारी और उनके रिश्तेदार फल फूल रहे हैं और आम प्रतिभावान छात्रों का भविष्य बड़ी साजिश के तहत रौंदा जा रहा है. बीएड ऑन स्पॉट एडमिशन में धांधली व सीट से ज्यादा नामांकन की शिकायत को बनी जांच कमिटी पूरी तरह तरह से दोषियों के गोद में बैठ कर मोटी रकम ले मामले को लंबा खिंच रही है जिसे वाम छात्र संगठन किसी कीमत पर कामयाब नहीं होने देगा. बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि जांच कमिटी बना मामले को रफा दफा करने का इतिहास रखने वाला विश्वविद्यालय पहली दफा अपनी ही चाल में फंसा है.
दो दो सीनेट, सिंडीकेट के कड़े आदेश कुलपति के अनेकानेक रिमाइंडर के बाद भी दस दिन की जगह एक साल दो माह बाद भी दो जांच कमिटी द्वारा रिपोर्ट नहीं दे पाना और एमएड एंट्रेंस टेस्ट का रिजल्ट अब तक नहीं देना, मुख्यालय शिक्षा शास्त्र विभाग में स्थापना काल से शिक्षकेत्तर कर्मचारी की बहाली नहीं करना, शिक्षा शास्त्र के शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन नहीं देना यह दर्शाता है कि अंदर कुछ बहुत बड़ा गोलमाल है और पैसों का बड़ा खेल चल रहा है. कारण जो भी हो जांच कमिटी को रिजल्ट हर हाल में देना होगा वरना एआईएसएफ का यह पार्ट थ्री आंदोलन को और नए रूप में तेज करेगा.
अगर अविलंब रिपोर्ट नहीं आया तो जांच टीम को साड़ी,चुरी और श्रृंगार का सामान भेंट कर विरोध दर्ज किया जाएगा की जब रिपोर्ट नहीं दे सकते तो सज धज कर घर में ही बैंठे. उसके बाद भी बात नहीं बनी तो जला मोबील, मैले से भरा घैला तक भेंट कर विरोध जताया जाएगा. राज्य परिषद् सदस्य सौरभ कुमार, और छात्रा नेत्री मौसम प्रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों की तनिक भी चिंता नहीं है जांच को जहां मजाक बना दिया है वहीं एम एड एडमिशन के एंट्रेंस टेस्ट का रिजल्ट डेढ़ माह बाद भी नहीं दिया गया जिससे यह शंका प्रबल होने लगी है कि कहीं एडमिशन में भी खेला की साजिश तो नहीं चल रही.
बीएनएमयू को पदाधिकारियों ने छात्रों के भविष्य निर्माण की जगह उनको बर्बाद करने का अड्डा बना दिया है. आज तक समय पर नामांकन, परीक्षा और परिणाम जहां सपना ही रहा वहीं पदाधिकारियों के भाषण में विश्वविद्यालय विकास के सातवें आसमान पर दिखाया जाता है भाषण की जगह अगर अपने आसन का थोड़ा ख्याल करते तो आज यह नौबत नहीं होती. जय प्रकाश, अंकेश, राकेश, इंद्रभूषण, जय कुमार, विकास, अमित, रईस, गौतम, सुधांशु, आशुतोष, आशीष, आर्या, सत्यम ने कहा कि दोषी पदाधिकारियों के बच्चों के साथ ऐसा होता तब उन्हें पता चलता कि इसकी क्या पीड़ा होती है. संगठन इस मामले को परिणाम तक ले जाने को प्रतिबद्ध है.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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