प्रधानाचार्य ने कहा कि यदि बेतहाशा जनसंख्या-वृद्धि को नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में लोगों को भोजन, वस्त्र एवं आवास उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए हमें जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में गंभीरता से प्रयास करना होगा. अब हम सबों को हम दो हमारे दो से आगे बढ़कर हम दो हमारे एक के सिद्धांत का पालन करना होगा. प्रधानाचार्य ने कहा कि आजादी के समय हमारी जनसंख्या तैंतीस करोड़ थी. लेकिन आज 75 वर्षों में हम एक अरब तैंतीस करोड़ हो गए हैं.
मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने कहा कि युवाओं पर ही समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्भर करता है. अतः युवाओं को जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने की जरूरत है. उप कुलसचिव (स्थापना) डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि महिला-शिक्षा का जनसंख्या नियंत्रण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसलिए समाज में महिलाओं की शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, तो जनसंख्या नियंत्रण आसानी से हो सकेगा. अतिथि व्याख्याता डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि आज भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया में नंबर वन पर आ गया है. यह हमारे लिए चिंता का सबब है.
इस अवसर पर शोधार्थी सौरभ कुमार चौहान, बबलू , पल्लवी, अंशु, नीलम, विक्की विजेता, राखी, सोनाली, रूपम, खुशी, सिंधु प्रिया, गीतांजलि, सोनी, मनीषा, नैना, मनीषा, जुली कुमारी, गुड़िया, आंचल, कुमारी गुप्ता, आशीष कुमार झा, मो. शाहनवाज, अविनाश, मिथिलेश, रणविजय, प्रतिभा, प्रियंका, मुस्कान, सरस्वती कुमारी आदि उपस्थित थे.
(रिपोर्ट:- ईमेल)
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