
मधेपुरा: पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने जिले के तीन महत्वपूर्ण थानों में नए थानाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है. यह फेरबदल 11 जून को हुई उस दर्दनाक सड़क दुर्घटना के बाद किया गया है जिसमें जिले के तीन थानाध्यक्षों की असामयिक मृत्यु हो गई थी. एसपी कार्यालय द्वारा जारी जिलादेश के मुताबिक, तीन पुलिस अवर निरीक्षकों का स्थानांतरण कर उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. सभी अधिकारियों को आदेश प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर अपने-अपने थानों में योगदान देने का सख्त निर्देश दिया गया है. अवर निरीक्षक सुड्डू कुमार को मुरलीगंज थाना से हटाकर आलमनगर प्रखंड के रतवारा थाना का नया थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. अवर निरीक्षक धीरज कुमार को ग्वालपाड़ा प्रखंड स्थित अरार थाना की कमान सौंपी गई है. अवर निरीक्षक स्नेहा कुमारी को मधेपुरा थाना से स्थानांतरित कर कुमारखंड प्रखंड के बेलारी थाना का प्रभार दिया गया है.

11 जून की देर रात बेगूसराय जिले के साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया था. मधेपुरा जिले के अरार थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र अमरेंद्र, रतवारा थानाध्यक्ष साजन पासवान और बेलारी थानाध्यक्ष नीरज कुमार की इस हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी. तीनों अधिकारी पटना स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में सीसीटीएनएस यानी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम का प्रशिक्षण पूरा कर सरकारी वाहन से वापस मधेपुरा लौट रहे थे. हादसे में उनके निजी वाहन चालक की भी जान चली गई थी. एक ही रात में तीन थानों के प्रभारी खो देने से जिले की कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. इन्हीं रिक्त हुए पदों को भरने और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रखने के लिए यह तैनाती की गई है. एसपी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि थानाध्यक्ष और अंचल पुलिस निरीक्षक जैसे संवेदनशील पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार द्वारा तय मानकों का कड़ाई से पालन किया गया है.
स्वच्छ सेवा रिकॉर्ड अनिवार्य केवल वही पुलिस पदाधिकारी थानाध्यक्ष बन सकते हैं जिनका सर्विस रिकॉर्ड बेदाग हो और जिनके खिलाफ कोई गंभीर विभागीय जांच या आपराधिक मामला लंबित न हो. दोषसिद्ध पर रोक ऐसे अधिकारी जिन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा किसी मामले में दोषी करार दिया गया हो, वे इस पद के लिए अयोग्य माने जाएंगे. विभागीय सजा बनी बाधा जिन अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के तहत तीन या उससे अधिक बार बड़ी सजा मिल चुकी हो, उनकी तैनाती थानाध्यक्ष पद पर नहीं की जा सकती. शराबबंदी में लापरवाही पर 10 साल का प्रतिबंध बिहार में लागू शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में यदि किसी थानाध्यक्ष की लापरवाही सामने आती है, तो उसे अगले दस वर्षों तक किसी भी थाने के प्रभार से वंचित रखा जाएगा. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ये नियुक्तियां जिले में विधि-व्यवस्था बनाए रखने और रिक्त पदों को तुरंत भरने के उद्देश्य से की गई हैं, ताकि आम जनता को परेशानी न हो.
(रिपोर्ट:- सुनीत साना)
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