श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाई गई पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी. मंडल की 109वीं जयंती - मधेपुरा खबर Madhepura Khabar

 

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26 अगस्त 2026

श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाई गई पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी. मंडल की 109वीं जयंती

मधेपुरा: पूर्व मुख्यमंत्री एवं मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बिंदेश्वरी प्रसाद (बीपी) मंडल की 109वीं जयंती मंगलवार को मधेपुरा में श्रद्धा, सम्मान और गरिमापूर्ण वातावरण में राजकीय समारोह के रूप में मनाई गई. इस अवसर पर जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए. मुख्य समारोह बीपी मंडल के पैतृक गांव मुरहो स्थित समाधि स्थल पर हुआ. मुरहो स्थित समाधि स्थल पर बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, मधेपुरा सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर, जिलाधिकारी अभिषेक रंजन, आरक्षी अधीक्षक संदीप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित कर बीपी मंडल को श्रद्धांजलि दी. इससे पूर्व समाहरणालय के समीप बीपी मंडल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर भी जिलाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक, जनप्रतिनिधियों एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की. बीपी मंडल जयंती समारोह की शुरुआत सुबह छह बजे मधेपुरा शहर और मुरहो में प्रभातफेरी के साथ हुई. इसके बाद सुबह 10 बजे बीपी मंडल चौक स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई. सुबह 10:30 बजे मुरहो स्थित समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जबकि 10:35 बजे सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित हुई. 
सर्वधर्म प्रार्थना सभा के बाद अतिथियों ने समारोह को संबोधित करते हुए बीपी मंडल के जीवन, संघर्ष, विचार और सामाजिक न्याय के लिए उनके योगदान को याद किया. बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि बीपी मंडल ने सामाजिक न्याय की नींव को मजबूत करने तथा पिछड़े एवं वंचित वर्गों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके विचार आज भी सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. मधेपुरा सदर विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि बीपी मंडल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में आत्मसात किया जाए. उन्होंने लोगों से बीपी मंडल के बताए मार्ग पर चलने की अपील की. जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने कहा कि बीपी मंडल ने दशकों पहले ही समानता और समावेशी विकास की आवश्यकता को समझ लिया था. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परिवार अपने कमजोर सदस्यों को आगे बढ़ने में सहयोग करता है, उसी प्रकार समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है कि कमजोर एवं वंचित वर्गों को आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराए जाएं. उन्होंने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों और बीपी मंडल के कार्यों ने भारतीय समाज में एक ‘साइलेंट रिवोल्यूशन’ लाने का काम किया. 


जिलाधिकारी ने कहा कि समान अवसर के बिना प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल सकता और प्रतिभाओं को अवसर दिए बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है. उन्होंने लोगों से बीपी मंडल की तरह अपने विचारों पर दृढ़ रहते हुए ईमानदारी और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि जयंती को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय बीपी मंडल के विचारों और आदर्शों को पूरे वर्ष व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. समारोह को समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’ सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया. 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में जन्मे बीपी मंडल का जीवन संघर्ष, सामाजिक चेतना और सार्वजनिक सेवा की प्रेरक यात्रा रहा. जन्म के अगले ही दिन उनके पिता का निधन हो गया था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुरहो में हुई और आगे की शिक्षा उन्होंने मधेपुरा एवं दरभंगा में प्राप्त की. छात्र जीवन से ही वे जातीय भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे. बड़े भाई केपी मंडल के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर मुरहो लौटना पड़ा. इसके बाद वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. उन्होंने तीन बार विधानसभा, एक बार विधान परिषद और दो बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया. 

1 फरवरी 1968 को वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 50 दिनों का रहा, लेकिन इस अल्प अवधि में भी उन्होंने पिछड़े एवं वंचित वर्गों में राजनीतिक आत्मविश्वास जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 1979 में केंद्र सरकार ने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और बीपी मंडल को इसका अध्यक्ष बनाया. आयोग ने सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के अध्ययन के आधार पर 3,743 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में चिह्नित करते हुए आरक्षण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं। 31 दिसंबर 1980 को आयोग की रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को सौंपी गई. बाद में वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा की. सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में यह कदम भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा गया. 13 अप्रैल 1982 को 64 वर्ष की आयु में बीपी मंडल का निधन हो गया. हालांकि, सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के लिए उनके विचार आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं. जयंती समारोह उनके विचारों, संघर्षों और सामाजिक न्याय के प्रति योगदान को स्मरण करने के साथ-साथ समानता, समावेशन और अवसर के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर बना.

(रिपोर्ट:- ईमेल)

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