जिलाधिकारी ने कहा कि समान अवसर के बिना प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल सकता और प्रतिभाओं को अवसर दिए बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है. उन्होंने लोगों से बीपी मंडल की तरह अपने विचारों पर दृढ़ रहते हुए ईमानदारी और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि जयंती को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय बीपी मंडल के विचारों और आदर्शों को पूरे वर्ष व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. समारोह को समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’ सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया. 25 अगस्त 1918 को वाराणसी में जन्मे बीपी मंडल का जीवन संघर्ष, सामाजिक चेतना और सार्वजनिक सेवा की प्रेरक यात्रा रहा. जन्म के अगले ही दिन उनके पिता का निधन हो गया था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुरहो में हुई और आगे की शिक्षा उन्होंने मधेपुरा एवं दरभंगा में प्राप्त की. छात्र जीवन से ही वे जातीय भेदभाव के खिलाफ मुखर रहे. बड़े भाई केपी मंडल के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़कर मुरहो लौटना पड़ा. इसके बाद वे सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. उन्होंने तीन बार विधानसभा, एक बार विधान परिषद और दो बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया.
1 फरवरी 1968 को वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 50 दिनों का रहा, लेकिन इस अल्प अवधि में भी उन्होंने पिछड़े एवं वंचित वर्गों में राजनीतिक आत्मविश्वास जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वर्ष 1979 में केंद्र सरकार ने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया और बीपी मंडल को इसका अध्यक्ष बनाया. आयोग ने सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के अध्ययन के आधार पर 3,743 जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में चिह्नित करते हुए आरक्षण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं। 31 दिसंबर 1980 को आयोग की रिपोर्ट तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी को सौंपी गई. बाद में वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा की. सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में यह कदम भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा गया. 13 अप्रैल 1982 को 64 वर्ष की आयु में बीपी मंडल का निधन हो गया. हालांकि, सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के लिए उनके विचार आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं. जयंती समारोह उनके विचारों, संघर्षों और सामाजिक न्याय के प्रति योगदान को स्मरण करने के साथ-साथ समानता, समावेशन और अवसर के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर बना.(रिपोर्ट:- ईमेल)
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